Sunday , 24 September 2017
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चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो सबको देने ही होते हैं

whether-it-is-sorrow-or-happiness-then-everyone-has-to-give

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एक सेठ जी बहुत ही दयालु थे । धर्म-कर्म में यकीन करते थे । उनके पास जो भी व्यक्ति उधार मांगने आता, वे उसे मना नहीं करते थे । सेठ जी मुनीम को बुलाते और जो उधार मांगने वाला व्यक्ति होता उससे पूछते कि भाई ! तुम उधार कब लौटाओगे ? इस जन्म में या फिर अगले जन्म में 

जो लोग ईमानदार होते वो कहते -सेठ जी ! हम तो इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुकता कर देंगे ।और कुछ लोग जो ज्यादा चालक व बेईमान होते वे कहते – सेठ जी ! हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे । और अपनी चालाकी पर वे मन ही मन खुश होते कि क्या मूर्ख सेठ है ! अगले जन्म में उधार वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है । ऐसे लोग मुनीम से पहले ही कह देते कि वो अपना कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएंगे और मुनीम भी कभी किसी से कुछ पूछता नहीं था । जो जैसा कह देता मुनीम वैसा ही बही में लिख लेता ।

 एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास उधार मांगने पहुँचा । उसे मालूम था कि सेठ अगले जन्म तक के लिए रकम उधार दे देता है । हालांकि उसका मकसद उधार लेने से अधिक सेठ की तिजोरी को देखना था । चोर ने सेठ से कुछ रुपये उधार मांगे, सेठ ने मुनीम को बुलाकर उधार देने को कहा । मुनीम ने चोर से पूछा – भाई ! इस जन्म में लौटाओगे या अगले जन्म में 

 चोर ने कहा – मुनीम जी ! मैं यह रकम अगले जन्म में लौटाऊँगा ।

मुनीम ने तिजोरी खोलकर पैसे उसे दे दिए । चोर ने भी तिजोरी देख ली और तय कर लिया कि इस मूर्ख सेठ की तिजोरी आज रात में उड़ा दूँगा । वो रात में ही सेठ के घर पहुँच गया और वहीं भैंसों के तबेले में छिपकर सेठ के सोने का इन्तजार करने लगा । अचानक चोर ने सुना कि भैंसे आपस में बातें कर रही हैं और वह चोर भैंसों की भाषा ठीक से समझ पा रहा है ।

एक भैंस ने दूसरी से पूछा – तुम तो आज ही आई हो न, बहन ! उस भैंस ने जवाब दिया – “हाँ, आज ही सेठ के तबेले में आई हूँ, सेठ जी का पिछले जन्म का कर्ज़ उतारना है और तुम कब से यहाँ हो  उस भैंस ने पलटकर पूछा तो पहले वाली भैंस ने बताया – मुझे तो तीन साल हो गए हैं, बहन ! मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था यह कहकर कि अगले जन्म में लौटाऊँगी । सेठ से उधार लेने के बाद जब मेरी मृत्यु हो गई तो मैं भैंस बन गई और सेठ के तबेले में चली आयी । अब दूध देकर उसका कर्ज़ उतार रही हूँ । जब तक कर्ज़ की रकम पूरी नहीं हो जाती तब तक यहीं रहना होगा ।

 चोर ने जब उन भैंसों की बातें सुनी तो होश उड़ गए और वहाँ बंधी भैंसों की ओर देखने लगा । वो समझ गया कि उधार चुकाना ही पड़ता है, चाहे इस जन्म में या फिर अगले जन्म में उसे चुकाना ही होगा । वह उल्टे पाँव सेठ के घर की ओर भागा और जो कर्ज़ उसने लिया था उसे फटाफट मुनीम को लौटाकर रजिस्टर से अपना नाम कटवा लिया ।

हम सब इस दुनिया में इसलिए आते हैं, क्योंकि हमें किसी से लेना होता है तो किसी का देना होता है । इस तरह से प्रत्येक को कुछ न कुछ लेने देने के हिसाब चुकाने होते हैं । इस कर्ज़ का हिसाब चुकता करने के लिए इस दुनिया में कोई बेटा बनकर आता है तो कोई बेटी बनकर आती है, कोई पिता बनकर आता है तो कोई माँ बनकर आती है, कोई पति बनकर आता है तो कोई पत्नी बनकर आती है, कोई प्रेमी बनकर आता है तो कोई प्रेमिका बनकर आती है, कोई मित्र बनकर आता है तो कोई शत्रु बनकर आता है, कोई पढ़ोसी बनकर आता है तो कोई रिस्तेदार बनकर आता है । चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो सबको देने ही होते हैं

                                                                                                                                                               Read More

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A Seth Ji was very kind. Used to believe in religion. They did not refuse any person who came to demand lending. Seth Ji called him and asked the person who was asking for a loan, that brother! When will you borrow? In this birth or next birth

Those people who are honest should say that – Seth ji! We will repay your debt in this life. And some people who were more vigilant and dishonest people say – Seth ji! We will deduct your debt in the next life. And on their own trickery they would have been pleased with the mind that if a fool is a fool! In the next life, borrowing is expected to return. Such people would say before the munim that they would return their debt to the next life and the munim also did not ask anybody anything. As you say, the munim would write in the same book.

One day a thief even approached Seth Ji for lending. He knew that Seth lends money to the next birth. Though he had to see Seth’s safe more than borrowing his motive. The thief asked Seth to lend a few bucks, Seth called the moneylender and asked him to lend. Munim asked the thief – brother! Return to this birth or in the next life

Thief said – Munim ji! I will return this amount to the next birth.

Munim opened the vault and gave him the money. The thief also saw the vault and decided that it will blow up this idiot Seth’s vault tonight. He reached Seth’s house at night and at the same time in the buffalo stables, he was waiting for Seth’s gold. Suddenly the thief heard that the buffaloes are talking among themselves and that the thief is able to understand the language of buffalo properly.

A buffalo asked the other – you have just come today, sister! That buffalo replied – “Yes, today I have come to Seth’s stables, to take a loan from Seth Ji’s previous birth and when you have been here, the buffalo turned back and asked if the buffalo said earlier – I have three years. Gone, sister! I borrowed from Seth Ji saying that I will return to the next life. After borrowing from Seth, when I died, I became a buffalo and went to Seth’s stables. Now I am taking the loan by giving milk. Unless the loan amount is completed, it will be there only.

When the thief heard the words of those buffaloes, the senses went away and started looking at buffaloes there. He understood that it has to be repaid, whether he has to repay in this birth or next life. He ran towards Seth’s house in the opposite direction and returned the instant accountant who had taken the loan and took his name from the register.

We all come in this world, because we have to take anybody so someone has to give. In this way, each one has to pay according to giving something or something. To make a calculation of this loan, there is no son in this world, then a daughter comes as a daughter, if someone comes as a father, then a mother comes and becomes a husband, then she comes by becoming a wife, becoming a lover Now it comes as a girlfriend, if someone comes as a friend, then an enemy comes and becomes a reader, then someone comes as a risistar. Whether it is sorrow or happiness, then everyone has to give

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