Thursday , 13 July 2017
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विवेकपूर्ण कर्म से प्रशस्त होगा स्वर्ग का मार्ग

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विवेकपूर्ण कर्म से प्रशस्त होगा स्वर्ग का मार्ग

                                                                विवेकपूर्ण कर्म से प्रशस्त होगा स्वर्ग का मार्ग

एक वृद्धा थी। उसकी कोई संतान न थी। उसके पास अपार धन-संपत्ति थी और उसने जीवन भर धन का सदुपयोग ही किया था।

अंत समय में स्वर्ग से जब यमदूत उस महिला को लेने पहुंचे तो उन्होंने कहा, ‘चलिए! आपको स्वर्ग ले चलना है।’ यह सुनकर उस वृद्धा के मन में लोभ जागा और वह देवदूतों से बोली, ‘मुझे बहुत जरुरी काम है, इसलिए कुछ समय दे दीजिए। दूत उसको एक वर्ष का समय देकर चले गए।’
इस बार उस महिला ने कर्ज पर रुपया देकर सूद और ब्याज लेना आरंभ कर दिया। लालच बढ़ा तो चोरी, फरेब, झूठ जैसे दुर्गुण स्वभाव का अंग बन गए। देखते-देखते एक वर्ष व्यतीत हो गया। इस बार उसे लेने यमदूत पहुंचे और बोले, ‘चलो! नरक चलने का समय हो गया।’
वो महिला बोली, ‘पर एक वर्ष पहले तो मुझे स्वर्ग ले जाया जा रहा था, फिर ये परिवर्तन कैसे?’ यमदूत बोले- ‘तुमने जीवन भर जितने पुण्य किए थे, एक वर्ष में उससे ज्यादा पाप कर डाले।’ इसलिए अब तुमको नर्क ले जाया जा रहा है।
In English

There was an old man. She had no children. He had immense wealth and he used to use his wealth throughout his life.

When the angel came to take the woman from heaven in the end, he said, ‘Come on! You have to move to heaven. ‘ Having heard this, the greediness was in the mind of the old man and he said to the angels, ‘I have a lot of work, so give some time. The angel went away giving him one year’s time. ‘
This time, the lady started taking interest and interest by paying a rupee loan. Greed has become an integral part of the debilitating nature, such as stealing, fraud, lying. Seeing a year has passed. This time he reached the messenger and said, ‘Come on! It’s time to walk to hell. ‘
The woman said, ‘But I was being taken to heaven a year ago, then how did this change?’ The eunuch said, ‘You have done more sins throughout your life than you did in a year.’ So now you are being taken to Hell.

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