एक कौए ने बहुत सारे मोर पंख इकट्टे किए और उन्हें अपने तन पर लगा लिए। उसे अपना नया रूप बहुत अच्छा लगा और उसने निश्चय किया कि अब वह कौओं के साथ नहीं, बल्कि मोरों के साथ रहेगा।
इसके बाद वह अपने पुराने साथियों का तिरस्कार करके वहाँ से चला गया और मोरों के झुंड में मिलने की कोशिश करने लगा। हालाँकि, मोरों ने तुरंत पहचान लिया कि उनके बीच में एक कौआ आ गया है ।
उन्होंने अपनी चोंचों से नोंच-नोंचकर कौए के तन पर लगे मोर पंख नोंच डाले और उसका मखौल उड़ाने लगे। अपमानित और दुखी कौआ भारी मन से अपने घर वापस लौट आया।
सारे साथी कौए सिर हिलाते उसके पास आ पहुँचे और कहने लगे, “तुम बहुत ही नीच जीव हो! अगर तुम अपने ही पंखों से संतुष्ट रहते तो तुम्हें दूसरों से इस तरह का अपमान नहीं सहना पड़ता और न ही तुम्हारे अपने लोगों के बीच तुमसे घृणा की जाती।”
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