एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। एक दुर्घटना में उसकी आँखें सूज गईं। उसने गाँव के एक वैद्य को बुलाया। वैद्य ने, उसकी आँखें जाँचने के बाद कहा-“तुम्हारी आँखें बिल्कुल ठीक हो जाएगी।
लेकिन, जब तक मैं तुम्हारा इलाज – करूँगा, तब तक तुम्हारी आँखें बंद रहनी चाहिएं। इसके अलावा, फीस भी ज्यादा लूंगा।” बुढ़िया मान गई। इलाज के दौरान उसने अपनी आँखें बंद रखीं।
इसी बीच, उस वैद्य ने बुढ़िया के घर का सारा सामान चुरा लिया। इलाज के बाद बुढ़िया ने आँखें खोलीं, तो अपने घर का सारा सामान गायब पाया। उसने वैद्य को फीस देने से मना कर दिया।
तब वे दोनों कोर्ट गए और सारी कहानी जज को सुनाई। बुढ़िया ने जज से कहा-“मैं इसे फीस क्यों दूं? इलाज से पहले मैं अपने घर का सारा सामान देख सकती थी,
पर अब मुझे कोई सामान नहीं दिखाई देता।” जज ने बुढ़िया के पक्ष में ही फैसला किया। वैद्य ने चुपचाप इस फेसले को मान लिया, क्योंकि उसने बुढ़िया के साथ धोखा किया था।
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