सोहन एक बेरोजगार युवक था। वह कुछ कार्य करना चाहता था। इसलिए उसने महल के द्वार पर खड़े होकर राजा से नौकरी माँगने का निर्णय लिया। अगले दिन वह महल के द्वार पर खड़े होकर राजा का इंतजार करने लगा।
समय व्यतीत करने के लिए वह महल के अंदर आने जाने वाले व्यक्तियों की गिनती करने लगा। पूरे दिन उसने अन्दर जाने वाले दस अजनबी व्यक्तियों की गिनती की। लेकिन शाम तक उनमें से सिर्फ नौ ही व्यक्ति बाहर आए थे।
शाम को जब राजा महल से बाहर आए तो सोहन ने उनसे नौकरी की। बात की लेकिन दुर्भाग्यवश राजा ने उसे मना कर दिया। तब सोहन ने राजा से कहा, “महाराज,
महल के अंदर जाने वाले दस अजनबियों में से सिर्फ नौ ही अजनबी बाहर आए हैं। एक व्यक्ति अब भी अंदर ही है।” यह सुनकर राजा ने उसी वक्त अपने सैनिकों को उस दसवें व्यक्ति को ढूँढने का आदेश दिया।
वह व्यक्ति राजा के ही कमरे में छुपा हुआ था। सैनिकों ने उसे पकड़ लिया। वह व्यक्ति दुश्मन देश का जासूस था, जो राजा को मारने आया था। यह देखकर राजा सोहन से बहुत खुश हुआ और उसने उसे अपना अंगरक्षक बना लिया।
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