एक राजा का बहुत बड़ा फलों का बगीचा था। जिसमें विभिन्न प्रकार के फलों के पेड़ लगे हुए थे। माली रोज विभिन्न पेड़ों के सभी पके हए फलों को एकत्र कर राजा को भेंट करता था।
एक दिन माली ने कुछ चेरियाँ एकत्र की और उन्हें राजा के लिए ले गया। उस दिन राजा का मिजाज बहुत खराब था। उसने एक चेरी को चखा तो उसका स्वाद बहुत खट्टा पाया। अब तो राजा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
उसने गुस्से से वह चेरी माली पर दे मारी। माली को चोट लगी, लेकिन वह बोला,”भगवान बड़ा दयालु है।” माली के शब्द सुनकर राजा आश्चर्यचकित होकर बोला,
“मैंने तुम्हें मारा और और तुम कह रह रहे हो भगवान बड़ा दयालु है। क्यों?” माली बोला, “महाराज, मैं तरबूज लाने जा रहा था। लेकिन किस्मत से मैंने अपना इरादा बदल लिया।
मैं तो ये कल्पना कर रहा था कि यदि आप तरबूज फेंककर मुझे पर मारते तो मेरा क्या होता! इसलिए मैंने कहा कि भगवान बड़ा दयालु है। राजा उसकी बात सुनकर हँस पड़ा।
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