“बरसात” के बाद शैलेन्द्र आर के कैंप का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए थे। राज कपूर और शंकर जयकिशन से उनकी करीबी दोस्ती हुई थी। ख़ास कर शंकर से उनकी ज्यादा जमती थी। आर के की श्री 420 के लिए गीतों का काम चल रहा था। शैलेन्द्र ने एक गीत का मुखड़ा लिखा और शंकर को दिखाया, शंकर बोले वाह शैलेंदर वाह क्या मुखड़ा लिखा है! बहोत बढ़िया गाना पूरा करके देना सबको जरुर पसंद आयेगा। शैलेन्द्र खुश हुए और उन्होंने अंतरे लिख दिए। पहला अंतरा पढ़ा फिर दूसरे अंतरा पढने लगे..
रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियां
गीत हमारे प्यार के दोहराएंगी जवानियाँ…
ये पंक्तियाँ पढ़ते ही शंकर ने कहा “शैलेंदर तुम पगला गए हो क्या? दिशाएँ तो चार होती है, तुमने दस कहाँ से लाई?
शालेंद्र को गुस्सा आया उन्होंने कहा “ अभी अभी तो तारीफ़ कर रहे थे और अब पागल कह रहे हो? तुम्हे क्या मालुम कितनी होती है, दिशाएँ दस ही होती है!” लेकिन शंकर मान नहीं रहे थे वो कह रहे थे कह रहे थे शैलेंदर इसे चार कर दो नहीं तो सब तुम पर हसेंगे कहेंगे की इतनी सी बात इसको नही मालुम और गीतकार
बना है!, झगड़े बढ़ते बढ़ते राज कपूर तक पहुँच गए। राज कपूर ने कहा दोनों अपना अपना काम करो, एक दुसरे के काम में दखलांदाजी मत करो फायनल तो मुझे ही करना है! आखिर शंकर मान गए और गाना मन्ना डे और लता जी की आवाज़ में रिकॉर्ड हुआ गाना जितना अच्छा बना था उससे भी खुबसुरत तरीके से वो नर्गिस
राजकपूर और तीन cute बच्चों पर (उनमे सबसे छोटे ऋषि कपूर थे) फिल्माया गया था। फिल्म इंडस्ट्री में आज भी कल्ट सॉंन्ग माना जाता है। और हाँ दस दिशाओं पर भी कोई हंसा नहीं, शंकर भी नहीं की चर्चा होने लगी तब उत्साहित राजकपूर ने श्री 420 फिल्म की शुटिंग बंबई से ठीक उतनी दूर करने की ठानी जैसा फिल्म का नाम था।
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