आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जीवित पुत्रिका के रूप में मनाते हैं| इस व्रत को करने से पुत्र शोक नहीं होता| इस व्रत का स्त्री समाज में बहुत ही महत्व है| इस व्रत में सूर्य नारायण की पूजा की जाती है|
विधि:
स्वयं स्नान करके भगवान सूर्य नारायण की प्रतिमा को स्नान करायें| धूप, दीप आदि से आरती करे एवं भोग लगावें| इस दिन बाजरा से मिश्रित पदार्थ भोग में लगाये जाते हैं|
श्री सूर्यनारायण जी की आरती:
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव |
रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता |
षटपत मन मुदकारी, हे दिनमणि ! ताता |
जग के हे रविदेव,जय जय जय रविदेव
नभमण्डल के वासी,ज्योति प्रकाशक देवा |
निज जनहित सुखरासी, तेरी हमसब सेवा |
करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव |
कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी |
निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी
हे सुरवर रविदेव जय जय जय रविदेव
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