फागुन में होली खेलु गी मैंने कर ली है फुल तयारी कान्हा मोहे ला दे पिचकारी
तू किनसे होली खेलेगी बतलादे ओ राधा प्यारी मत मंगवावे तू पिचकारी….
मैं रंग बहुत सो ले आई
मैंने चार मटकिया घडवाई
मो को तो सब को रंगना है चाहे आवे कोई नर और नारी
कान्हा मोहे लागे पिचकारी
तू किनसे होली खेलेगी बतलादे ओ राधा प्यारी मत मंगवावे तू पिचकारी….
तेरो गोरो कात जो रंग जाएगो जो नीलो पीलो पड़ जाएगो
तू तब तक पूरी रंग जायेगी जब आएगी तेरी बारी
मत मंगवावे तू पिचकारी
फागुन में होली खेलु गी मैंने कर ली है फुल तयारी कान्हा मोहे ला दे पिचकारी…….
तेरी बतिया एक न मानु मैं तोहे कुर्वी अमन रंग डारु मैं
चाहे जो हॉवे सो हो जावे
केशव की है जिमेदारी कान्हा मोहे लादे पिचकारी………………
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