सब कारे आजमाए ऊधौ सब कारे आजमाए
कारे भवंर मधूप के लोभी कली देख मंडराये
एक दिना खिल गिरी धरनि लौट दरस नहीं पाये
कारे नाग पिटारन पाले बहूतई दूध पिलाए
जब सुध आई उन्हें अपने कुटुंब की अंगुरिन में डस खाए
कारे केश सीस पर राखे अतर फुलेल लगाए
जेइ कारे न भऐ आपने श्वेत रूप दरसाए
कारे से कोऊ प्रीत न करियो कारे जहर बुझाये
सूरदास कह लौ समझइये सब बिधि से आजमाए,,,,,,,,,,,,,
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