त्र्यंबाकम यजा-महे
सुगंधीं पुष्टि-वरडानम
उर्वा-रुका मीना बँधा-नट
मृत्योर मुक्शिया ममृतात
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[To English Wish4me]
Tryambakam yaja-mahe
Sugamdhim pushti-vardanam
Urva-ruka mena bamdha-nat
Mrutyor mukshiya mamrutaat
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इस कहानी में हरिराम नामक आदमी के बदलते दृष्टिकोण और उसकी नास्तिकता से बच्चे को दवा देने की भरपूर भावना को दर्शाया गया है।.........
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