एक बार ऐसा हुआ कि एक लोमड़ी गलती से अपनी पूँछ खो बैठी। इस बात से वह इतनी शर्मिंदा थी कि वह अपने आप को मार देना चाहती थी। वह शर्मिंदगी से बचने के उपाय ढूंढने लगी।
कई घंटे सोचने के बाद उसे एक उपाय सूझा। उसने सोचा, अगर वह सभी लड़कियों को, पूँछ कटवाने के लिए मना ले, तो उसे किसी के आगे शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। ऐसा सोच कर, एक दिन उसने जंगल की सभी लड़कियों की एक बैठक बुलाई।
एक बहुत बड़े मैदान में सभी लड़कियाँ जमा हुईं। तब लोमड़ी ने कहना शुरु किया- “बहनों, मुझे यह विचार आया है कि तुम सबको अपनी पूँछ कटवा देनी चाहिए। पूँछ बहुत भारी हैं और देखने में भी बुरी हैं।
तुम इसके बिना ही अच्छी लगेगी।” लड़कियों ने जवाब दिया- “अच्छा! अगर ऐसा है, तो तुम अपनी पूँछ के बिना इतनी उदास क्यों हो?” लोमड़ी अब कुछ न बोल सकी और वहाँ से चुपचाप चली गई।
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