जब संसार बनाया जा रहा था, तब देवताओं ने एक उत्तम रचना बनाने की सोची। इसलिए उन्होंने मैरी नाम की एक लड़की बनाई जो बुद्धिमान और कुशल थी।
पृथ्वी पर भेजने से पहले वे उसे अपने राजा बृहस्पति के पास ले गए। राजा ने उसे एक संदेश दिया और कहा-“इसे कभी मत खोलना।”
परंतु एक दिन मैरी को इतनी उत्सुकता हुई, कि उसने भूल से संदूक खोल दिया। अचानक उसने देखा, संदूक में से सारी बुराइयाँ- बुढ़ापा, बीमारियाँ, लालच आदि बाहर आने लगी थीं।
यह देखकर उसने संदूक को बंद करने की बहुत कोशिश की, परंतु वह बंद नहीं हुआ। वह सारी बुराइयाँ सारे संसार में फैल गई और तब से पूरी मानव जाति को दुख भोगना पड़ रहा है।
मैरी को अपनी भूल का बहुत दुख हुआ। भाग्य से, उस संदूक में आशा भी थी। वही आशा, मानवता की बुराइयों से हमारी रक्षा करती है।
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