आज मोहे राधा छल गई रे
आज मोहे श्यामा छल गई रे
ऐ री मैया मैं कहा करू मोहे श्यामा छल गई रे
आज मोहे राधा छल गई रे
मै थारो इक कदम की छैयाँ
पास में चर रही मोरी गईयाँ,
नैनं के वो तीर चलाई के घ्याल कर गई रे
आज मोहे राधा छल गई रे
इन ग्वालन को मन है कारो मैं तेरो बालक भोलो भालो
बातन मो पे बंसी लेके साफ़ निकल गई रे
आज मोहे राधा छल गई रे
मैया मैं बरसाने जाऊ बाते अपनी बंसी लाऊ,
बिन बंसी के मैया ने कर मोहे दहिया वग गई रे
आज मोहे राधा छल गई रे
मैं बोलू वो चतुर गुजरियां ब्रिज में ले गई पकड़ उंगलियाँ
तनक छाश पे नाच नाचाये मोहे गोरी दे गई रे
आज मोहे राधा छल गई रे…….
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