आओ रे आओ रे आओ रे,
कैसे आओ रे किशन थारी ब्रिज नगरी,
आओ रे आओ रे आओ रे,
यमुना जल लाऊ तो कान्हा प्याल मोरी भीगे,
झटपट चलू तो मोरी छलके गगरी
आओ रे आओ रे आओ रे,
किनारे चलू तो कान्हा पायल मोरी भाजे,
बीच में चलू तो बेह जाए गगरी,
आओ रे आओ रे आओ रे,
रात को आऊ तो कान्हा डर मोहे लागे,
दिन में आऊ तो देखे सारी नगरी
आओ रे आओ रे आओ रे,
आईटी मथुरा उत गोकुल नगरी
बीच में यमुना बहे गेहरी,
आओ रे आओ रे आओ …….,
जब कोई नहीं आता मेरे श्याम आते है,
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है,
मेरी नैया चलती है पतवार नहीं होती,
किसी और की मुझको दरकार नहीं होती,
मैं डरता नहीं रस्ते सुनसान आते है,
कोई याद करे इनको दुःख हल्का हो जाये,
कोई भक्ति करे इनकी ये उनका हो जाये,
ये बिन बोले सब कुछ पहचान जाते है,
ये इतने बड़े हो कर दीनो से प्यार करे,
अपने भगतो के दुःख पल में स्वीकार करे,
सब भगतो का कहना ले मान जाते है,,,,,,,,,
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