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आया आया सांवरिया है बन के चोर


आया आया सांवरिया है बन के चोर
आया आया है बन के चोर
समज न पाऊ कैसे बताऊ
डर है कही देखे न और
के डर गई मैं मर गई मैं
आया आया सांवरिया है बन के चोर……

खड़ा है वो नीचे खिड़की के पीछे
उंगली है खीचे दर से मैं हो गई वनवारी
गोरी से मैं हो गई सांवली
मन में तो है न ये रात बीते
बाँध लू रात मैं न होने दू भोर
के डर गई मैं मर गई मैं
आया आया सांवरिया है बन के चोर….

उसे न जाने दो ना हाथ छुडाने दो
मन ये केहता है यही पे हमेशा वो रहे
तन मन मेरा ये कहे
मन में समाये मनवा चुराए नाचू मैं सारी रात बन जाऊ मोर
के डर गई मैं मर गई मैं
आया आया सांवरिया है बन के चोर……

नैना मत वारे काले कजरारे जादू है डारे,
खिचती सी जाऊ क्या करु सोच न पाऊ क्या करू
दिल को चुराने आया है शायद जेवर चुराता तो मचा देती शोर
के डर गई मैं मर गई मैं
आया आया सांवरिया है बन के चोर……….

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