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vikkykyt@yahoo.com

सकारात्मक सोच पर प्रेरणादायक कहानी

कैसोवैरी चिड़िया को बचपन से ही बाकी चिड़ियों के बच्चे चिढाते थे। कोई कहता, ” जब तू उड़ नहीं सकती तो चिड़िया किस काम की।”, तो कोई उसे ऊपर पेड़ की डाल पर बैठ कर चिढाता कि,” अरे कभी  हमारे पास भी आ जाया करो…जब देखो जानवरों की तरह नीचे चरती रहती हो…” और ऐसा बोलकर सब के सब खूब …

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बंदों के दिल में रहता है खुदा

सूफी फकीर जुन्नैदा से किसी ने पूछा, ‘खुदा है तो दिखाई क्यों नहीं देता?’ जुन्नैदा ने कहा, ‘खुदा कोई वस्तु नहीं है। वह अनुभूति है।’ उसे देखने के लिए कोई उपाय नहीं है। हां, उसे अनुभव जरूर किया जा सकता है। फकीर की ये बातें उस व्यक्ति को संतुष्ट नहीं कर सकीं। उसने फिर कहा, ‘ऐसा कैसे है? क्या ये …

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डाँकू रत्नाकर और देवऋषि नारद | उपनिषद् की कहानियां

  बहुत समय पहले की बात है किसी राज्य में एक बड़े ही खूंखार डाँकू  का भय व्याप्त था।  उस डाँकू का नाम रत्नाकर था।  वह अपने साथियों के साथ जंगल से गुजर रहे राहगीरों को लूटता और विरोध करने पर उनकी हत्या भी कर देता।  एक बार देवऋषि नारद भी उन्ही जंगलों से भगवान का जप करते हुए जा रहे …

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गांधीजी को यूं ही नहीं कहते हैं महात्मा

  महात्मा गांधी जी छुआछूत के खिलाफ थे। एक बार उन्होंने अपने आश्रम में दलित और सवर्ण के विवाह की अनुमति दी। हालांकि उस समय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अगुआई कर रही कांग्रेस गांधी जी द्वारा दलितों के सामाजिक उत्थान हेतु चलाये गये इन कदमों से सहमति नहीं रखती थी क्योंकि उसका मानना था कि ‘सामाजिक सुधार’ को ‘स्वतंत्रता आन्दोलन’ …

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किसी का अंधा अनुसरण ना करने की सीख देती हिंदी कहानी

एक बार की बात है। एक गुरूजी थे। उनके बहुत से शिष्य थे। उन्होंने एक दिन अपने शिष्यों को बुलाया और समझाया-शिष्यों सभी जीवों में ईश्वर का वास होता है इसलिए हमें सबको नमस्कार करना चाहिए। कुछ दिनों बाद गुरूजी ने एक विशाल हवन का आयोजन किया और कुछ शिष्यों को लकड़ी लेने के लिए पास के जंगल भेजा। शिष्य लकड़ियाँ …

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मन में यदि सुराख है तो उसमें प्रेम कैसे भरेगा

  गौतम बुद्ध यात्रा पर थे। रास्ते में उनसे लोग मिलते। कुछ उनके दर्शन करके संतुष्ट हो जाते तो कुछ अपनी समस्याएं रखते थे। बुद्ध सबकी परेशानियों का समाधान करते थे। एक दिन एक व्यक्ति ने बुद्ध से कहा- मैं एक विचित्र तरह के द्वंद्व से गुजर रहा हूं। मैं लोगों को प्यार तो करता हूं पर मुझे बदले में …

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जब सिकंदर को खुद का अभियान लगा मूर्खतापूर्ण

  विश्वविजय पर निकला सिकंदर यूनान से भारत तक आ पहुंचा था। वह एक जंगल से आगे बढ़ रहा था। तभी एक साधु शिला पर लेटे हुए मिले। सिकंदर को देखकर भी वह ज्यों के त्यों लेटे रहे। सिकंदर ने गुस्से में कहा, ‘आपको मालूम है कि आपके सामने विश्वविजेता खड़ा है?’ साधु ने तब निश्चिंत होकर कहा, तुम खून …

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जब एक किताब ने बदल दी वर्नर की जिंदगी

एक किताब किसी के जीवन को किस हद तक प्रभावित कर सकती है इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं नोबेल पुरस्कार विजेता ‘वर्नर हाइजेनवर्ग’। पश्चिम जर्मनी के वर्नर हाइजेनवर्ग महान भौतिकशास्त्री थे। जब वर्नर 19 वर्ष के थे तब वह विद्यालय में ही संतरी की काम किया करते थे। एक दिन ड्युटी के दौरान ही उन्हें विख्यात दार्शनिक प्लेटो की किताब …

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नहीं थे राजा, हो रहे थे परेशान और जब मिले तो

एक बड़ा सा तालाब था उसमें सैकड़ों मेंढ़क रहते थे। तालाब में कोई राजा नहीं था। दिन पर दिन अनुशासनहीनता बढ़ती जाती थी और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था। उसे ठीक करने का कोई यंत्र तंत्र मंत्र दिखाई नहीं देता था। नई पीढ़ी उत्तरदायित्व हीन थी। जो थोड़े बहुत होशियार मेंढ़क निकलते थे वे पढ़-लिखकर अपना …

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सिर्फ ऐसी ही मिल सकेगी जल्द सफलता

  एक पुजारी कई दिनों से यज्ञ कर रहे था, लेकिन उन्हें अग्निदेव के दर्शन नहीं दे रहे थे। तभी उस गांव में राजा विक्रमादित्य पहुंचे। पुजारी का उतरा चेहरा देखकर उन्होंने उसका हाल-चाल पूछा। राजा उसकी परेशानी समझ चुके थे। फिर राजा ने समझाया, ‘यज्ञ ऐसे नहीं करते हैं।’ राजा ने अपना मुकुट उतार कर जमीन पर रखा और …

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