भीगे है कान्हा चुनरी रंग मत डारो,
भीगे है कान्हा चुनरी छलक रही गगरी
मैं नाजुक ठेहरी रंग मत डारो,
भीगे है कान्हा चुनरी रंग मत डारो,
ग्वालो के संग कान्हा यु न सताओ
अंग अंग कांपे है रंग न लगाओ
दिखे है सारी नगरी रंग मत डारो,
भीगे है कान्हा चुनरी रंग मत डारो,
करुँगी शिकायत मैया से तोरी,
छोडू मोरी बहियाँ न करू वर जोरी
करो न ऐसे जबरी रंग मत डारो,
भीगे है कान्हा चुनरी रंग मत डारो,
माने न बतियाँ तू काहे नन्द लाला
लाल हरा नीला पीला सब रंग डाला,
छोड़ो जी मोरी डगरी रंग मत डालो
भीगे है कान्हा चुनरी रंग मत डारो,,,,,,,,
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