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झूला झूलत बिहारी वृंदावन में

झूला झुलत बिहारी वृंदावन मेंकैसी छाई हरियाली इन कुंजन मेंझूला झुलत बिहारी वृंदावन में……. इत नन्द को बिहारी उत भानु की दुलारीजोड़ी लागे अति प्यारी बसी नयननि मेंझूला झुलत बिहारी वृंदावन में…… यमुना के कूल वहे सुरंग दुकूलऔर खिल रहे फूल इन कदंबनि मेंझूला झुलत बिहारी वृंदावन में….. गौर श्याम रंग घन दामिनी के संगभई अखियां अपंग छवि भरी मन …

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मुझे तेरा दीवाना बना दिया

ये जो दिल पे छाया सुरूर हैये तेरी नज़र का ही नूर हैके प्रेम करना सीखा दियातेरे प्रेम ने तेरी चाह नेतेरी बांकी बांकी आदाओं नेमुझे तेरा दीवाना बना दिया……. दीदार तेरा खुमार तेराये सब तुम्हारी ही रहमते हैंनज़र कन्हैया से जब मिली हैके हुमको अपनी खबर नहीं हैतेरे प्रेम ने तेरी चाह नेतेरी तिरछी तिरछी निगाह नेमुझे तेरा दीवाना …

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दुःख में सुमिरन

कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से दुःख स्वीकार करने को तत्पर नहीं हो सकता। सभी हर क्षण सुखी रहने की कामना करते हैं। महाभारत में जरूर पांडवों की माता कुंती का प्रसंग मिलता है, जो भगवान् से प्रार्थना करती हैं, ‘प्रभु, मेरे जीवन में समय-समय पर दुःख का आभास होते रहना चाहिए। मैंने अनुभव किया है कि सुख में आपकी याद …

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सरस किशोरी

सरस किशोरी वयस की थोरी,रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।सरस किशोरी, वयस की थोरी,रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।श्री राधे, कीजै कृपा की कोर| साधन हीन, दीन मैं राधे,तुम करुणामयी प्रेम अगाधे,काके द्वारे, जाय पुकारे,कौन निहारे, दीन दुःखी की ओर,सरस किशोरी, वयस की थोरी,रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।श्री राधे, कीजै कृपा …

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कुछ दे या ना दे श्याम इस अपने दीवाने को

कुछ दे या ना दे श्याम इस अपने दीवाने को,दो आंसू तो दे दे चरणों में बहाने को…. नरसी ने बहाए थे मीरा ने बहाए थे,जब जब भी कोई रोया तुम दौड़ के आये थे,काफी है दो बूँदें घनश्याम रिझाने को,दो आंसू तो दे दे चरणों में बहाने को….. आंसू वो खज़ाना है क़िस्मत से मिलता है,इनके बह जाने से …

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मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है

मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है,मिले ना उस जैसा वह जग से निराला है,जब जब दिल ये उदास होता है,मेरा मुरलीवाला मेरे पास होता है।मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है,मिले ना उस जैसा वह जग से निराला है…. जब जब रहा अकेला बड़ा दुःख पाया मैं,जब जब दुःख ने घेरा तो घबराया मैं,सारी दुनियाँ …

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हे श्याम तेरी महिमा क्या कहकर सुनाऊँ

बंसरी वाला मुरली वाला

हे श्याम तेरी महिमा क्या कहकर सुनाऊँ,ताकत नहीं जिव्हा में जो गीत तेरे गाऊँ। पाकर तेरा दर्शन होता है ये चित्त प्रशन्न,दर्शन के झलक से ही खिल जाता है मेरा मन,सब भूलता हूँ दुःख जब चरणों में तेरे आऊं,हे श्याम तेरी महिमा क्या कहकर सुनाऊँ,ताकत नहीं जिव्हा में जो गीत तेरे गाऊँ। जो जीव शरण आएं रंग भक्ति का पाएं,सब …

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प्रेम ही धर्म

स्वामी विवेकानंद विश्वधर्म सम्मेलन में भाग लेने 1894 में अमेरिका गए। वहाँ एक बुद्धिजीवी ने उनसे पूछा, ‘आपने असंख्य धर्मशास्त्रों का अध्ययन किया है। एक ही शब्द में क्या धर्म का सार व्यक्त कर सकते हैं?’ स्वामीजी ने तुरंत उत्तर दिया, प्राणी मात्र में भगवान् के दर्शनकर सभी से प्रेम करो, यही धर्म का सार है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘निष्कपट …

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दर्शन तो हमे तुम दे देना भगती से भर देना

तू ही है सब का दाता तू महावीर केहलाताजो चाहे मन से तुझको वो मन चाहा फल पातादर्शन तो हमे तुम दे देना भगती से भर देना| आशा के दीप जला कर हम तुम को दूर करेगे,रिक्त हिरदये में कर्म सनेह का अक्षय ध्यान भरे गेतेरे सन मुख हम सब मिल कर ज्योति माये दीप जलाएतेरे पद चिन्नो पे चल …

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प्यार में कान्हां जी के खोके

प्यार में कान्हां जी के खोके,दिल में अपनी भक्ति जगा के,मैं बेगानी सी सो गई,प्यार में कान्हाँ जी के खोके,दिल में अपनी भक्ति जगा के,मैं बेगानी सी सो गई….. गुन गुन करती मैं फिरती हूँ,वृन्दावन की गलियों में,मीरा जैसी प्रेम में डूबी,मैं दीवानी सी हो गई,प्यार में कान्हाँ जी के खोके,दिल में अपनी भक्ति जगा के,मैं बेगानी सी सो गई…. …

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