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मैं जो कल था, वह आज नहीं

मैं जो कल था, वह आज नहीं

बात बहुत पुरानी है। एक बौद्ध गुरु के दर्शन करे लिए लोग दूर-दूर से आते थे। गुरुजी बड़ी ही उदारता के साथ लोगों से मिलते थे। वह लोगों की समस्याओं को सुनते और उनका समाधान करते। इस तरह धीरे-धीरे शरणार्थियों की भीड़ बढ़ने लगी। तभी एक दिन गुरुजी की प्रशंसा सुन, एक व्यक्ति मिलने आया। वह बहुत गरीब था। वह …

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आगे जाना है तो अपनाएं सहनशीलता

आगे जाना है तो अपनाएं सहनशीलता

एक बार सरयूदास रेलगाड़ी से कहीं जा रहे थे। गाड़ी में भारी भीड़ थी। कहीं तिल रखने का स्नान भी नहीं था। संतजी के पास ही एक मजबूत कद काठी का व्यक्ति बैठा था। वह बार-बार संत की ओर पैर बढ़ाकर ठोकर मार देता था। संत सरयूदास ने बड़े दयाभाव से कहा, ‘भाई संकोच मत करना। लगता है तुम्हारे पैर …

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दूध में चमेली के फूल की तरह रहे गुरु नानक

दूध में चमेली के फूल की तरह रहे गुरु नानक

एक बार गुरु नानक देव मुल्तान पहुंचे। वहां पहले ही अनेक संत धर्म प्रचार में लगे हुए थे। एक संत ने अपने शिष्य के हाथ में दूध से भरा हुआ एक कटोरा गुरु नानक देव को भेजा। गुरु नानक देव उठे, बाग से चमेली का एक फूल तोड़ा और दूध पर धीरे से टिका दिया। फिर शिष्य को कहा, जाओ …

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चीन के संत च्वांगत्से को कपाल ने दिया ज्ञान

चीन के संत च्वांगत्से को कपाल ने दिया ज्ञान

चीन के प्रसिद्ध संत च्वांगत्से रात के समय घूम रहे थे। अचानक उनको ठोकर लगी। उन्होंने संभल कर देखा वहां एक मानव की खोपड़ी पड़ी हुई थी। दार्शनिक कुछ देर खड़े होकर सोचते रहे फिर उन्होंने खोपड़ी उठाई और अपने थैले में डाल दी। उस दिन के बाद जब भी वे कहीं जाते उसे अपने साथ ही रखते। एक दिन …

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हंसी हर जगह मौजूद है बस हंसने के बहाने ढूंढिए

हंसी हर जगह मौजूद है बस हंसने के बहाने ढूंढिए

कन्नड़ लेखक एच. योगनसिंहम् ने महर्षि कर्वे ( भारतरत्न 1958 धोंडो केशव कर्वे) की आत्मकथा ‘लुकिंग-बैक’ का कन्नड़ में अनुवाद किया था। उनसे सिर्फ पत्र व्यवहार द्वारा ही परिचय था पर महर्षि कर्वे से वह कभी मिले नहीं थे। एक बार जब वे पूना गए तो वे महर्षि कर्वे से भेंट करना चाहते थे। उनकी यह मनोकामना पूरी हुई। उनकी …

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हर परेशानी को दूर कर सकते हैं ये 7 अमिट विचार

दुकानदार ने बच्चे को चार सीपों में महंगी गुड़िया दे दी, जानिए क्यों

आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानन्द के बारे में वैसे हम सभी काफी कुछ जानते हैं। लेकिन उनके कुछ विचार ऐसे हैं, जिन्हें बहुत कम जानते हैं। तो आइए जानते हैं वो अनमोल विचार… # उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए। # जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक भगवान पर …

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इस तरह मिल सकता है सच्चा सुख

इस तरह मिल सकता है सच्चा सुख

एक बार वीर शिवाजी के गुरु समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा मांगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी – जय जय रघुवीर समर्थ! घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोली मे भिक्षा डाली और कहा, महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए। स्वामीजी बोले, आज नहीं, कल दूंगा। दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज …

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परिश्रम के साथ रखें धैर्य सफलता जरूर मिलेगी

परिश्रम के साथ रखें धैर्य सफलता जरूर मिलेगी

एक बार गौतम बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। गर्मी का मौसम था। गांव पहुंचने से पहले ही बुद्ध के साथ जा रहे लोगों को जगह-जगह बहुत सारे गड्ढे खुदे हुए मिले। तब उनके एक शिष्य ने गड्डे देखकर जिज्ञासा प्रकट की, आखिर इस तरह गढे का खुदे होने का तात्पर्य कया है? …

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बापू की असाधारण और अक्षम्य गलती

बापू की असाधारण और अक्षम्य गलती

एक दिन मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) शाम की प्रार्थना सभा में बोलते-बोलते बहुत परेशान हो गए। उन्होंने कहा, जो गलती मुझसे हुई है, वह असाधारण और अक्षम्य है। कई बरस पहले मुझे इसका पता लगा, पर तभी मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस कारण से कई वर्ष नष्ट हो गए। मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया है। दरिद्रनारायण की …

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विंस्टन चर्चिल की कामयाबी का ये था अचूक फार्मूला

विंस्टन चर्चिल की कामयाबी का ये था अचूक फार्मूला

विंस्‍टन चर्चिल, अंग्रेज राजनीतिज्ञ थे। वे द्वितीय विश्वयुद्ध, 1940-1945 के समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री थे। राजनीतिज्ञ के रूप में उन्होंने कई पदों पर कार्य किया। विश्वयुद्ध से पहले वे गृहमंत्रालय में व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष रहे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे लॉर्ड ऑफ एडमिरिल्टी बने रहे। युद्ध के बाद उन्हें शस्त्र भंडार का मंत्री बनाया गया। 10 मई 1940 …

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