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गलतियों को सुधारने से जीवन आदर्श बनता है
एक पिता के दो पुत्र थे। दोनों ही युवा थे। दोनों का दावा था कि वे पिता के ह्दय से आज्ञाकारी थे और पिता भी ऐसा सुनकर काफी प्रसन्न होते थे। एक दिन पिता काफी बीमार हो गए। उन्हें लगा कि उनके शरीर में इतनी भी शक्ति नहीं है कि बगीचे में जाकर रोजमर्रा का काम कर पाएंगे। उन्होंने अपने …
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