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रक्षक प्रभु

Rakshak Parbhu

  इन्द्र से वरदान में प्राप्त एक अमोघ शक्ति कर्ण के पास थी । इन्द्र का कहा हुआ था कि इस शक्ति को तू प्राणसंकट में पड़कर एक बार जिस पर भी छोड़ेगा, उसी की मृत्यु हो जाएंगी, परंतु एक बार से अधिक इसका प्रयोग नहीं हो सकेगा । कर्ण ने वह शक्ति अर्जुन को मारने के लिए रख छोड़ी …

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शिवोपासना का अद्भुत फल

Ek Bar Bhagwan Narayan Story

प्राचीन काल में एक राजा थे, जिनका नाम था इंद्रद्युम्न । वे बड़े दानी, धर्मज्ञ और सामर्थ्यशाली थे । धनार्थियों को वे सहस्त्र स्वर्णमुद्राओं से कम दान नहीं देते थे । उनके राज्य में सभी एकादशी के दिन उपवास करते थे । गंगा की बालुका, वर्षा की धारा और आकाश के तारे कदाचित गिने जा सकते हैं, पर इंद्रद्युम्न पुण्यों …

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अवतार तत्त्व

Avtar Tatv

संसार के मूल तत्त्वों को हम दो भागों में बांट सकते हैं । जड़ और चेतन या प्रकृति और पुरुष । चाहे जड़ कहिये या प्रकृति कहिये, बात एक ही है । चेतन अधिष्ठाता के बिना जड़ वस्तु की क्रियाएं नियमित और श्रृंखलाबद्ध नहीं हो सकतीं और न इसके बिना एक अधिष्ठान में विरोधी गुण कर्म दिख सकते हैं, अत: …

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मूर्ति पूजन का तात्पर्य

Bhuvankosh Ka Sanshipt varnan

स्वामी विवेकानंद की ख्याति दिन प्रतिदिन फैलती रही । उनका गुणगान सुनकर अलवर राज्य के दीवान महोदय ने उन्हें अपने घर बुलाया । स्वामी जी का सत्संग करके दीवान जी ने अपना महोभाग्य माना । दूसरे दिन दीवान जी ने महाराज से इनके बारे में एक पत्र लिखकर चर्चा की । महाराज उस समय अलवर से दो मील दूरी पर …

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राजा भोज और महामद की कथा

Raja bhoj Or Mahamd Ki Katha

सूतजी ने कहा – ऋषियों ! शालिवाहन के वंश में दस राजा हुए । उन्होंने पांच सौ वर्ष तक शासन किया और स्वर्गवासी हुए । तदनंतर भूमण्डल पर धर्म मर्यादा लुप्त होने लगी । शालिवाहन के वंश में अंतिम दसवें राजा भोजराज हुए । उन्होंने देश की मर्यादा क्षीण होती देख दिग्विजय के लिये प्रस्थान किया । उनकी सेना दस …

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कीड़े से महर्षि मैत्रेय

Kire Se maharishi matray story

भगवान व्यास सभी जीवों की गति तथा भाषा को समझते थे । एक बार जब वे कहीं जा रहे थे तब रास्ते में उन्होंने एक कीड़े को बड़े वेग से भागते हुए देखा । उन्होंने कृपा करके कीड़े की बोली में ही उससे इस प्रकार भागने का कारण पूछा । कीड़े ने कहा – ‘विश्ववंध मुनीश्वर ! कोई बहुत बड़ी …

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देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओं का आविर्भाव

deshraj Avem Vatsraj Adi Rajao ka Abhibharv

सूत जी ने कहा – भोजराज के स्वर्गारोहण के पश्चात् उनके वंश में सात राजा हुए, पर वे सभी अल्पायु, मंद बुद्धि और अल्पतेजस्वी हुए तथा तीन सौ वर्ष के भीतर ही मर गये । उनके राज्यकाल में पृथ्वी पर छोटे – छोटे अनेक राजा हुए । वीर सिंह नाम के सातवें राजा के वंश में तीन राजा हुए, जो …

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कर्म का चरित्र पर प्रभाव

Bhuvankosh Ka Sanshipt varnan

कर्म शब्द ‘कृ’ धातु से निकला है, ‘कृ’ धातु का अर्थ है करना । जो कुछ किया जाता है, वहीं कर्म है । इस शब्द पारिभाषिक अर्थ ‘कर्मफल’ भी होता है । दार्शनिक दृष्टि से यदि देखा जाएं, तो इसका अर्थ कभी कभी वे फल होते हैं, जिनका कारण हमारे पूर्व कर्म रहते हैं । परंतु कर्मयोग में ‘कर्म’ शब्द …

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प्रेममयी श्री कृष्णा

Colorful religious krishna janmashtami card background

श्रीकृष्णजी का जीवन प्रेम का जीवन है, श्रीकृष्णजी का संगीत प्रेम का संगीत है, श्रीकृष्णजी की शिक्षाएं प्रेमतत्त्वों से परिपूर्ण हैं । गोपाल – कृष्ण ने दरिद्र , सरल और भोले भाले साथियों से मित्रता की और अपने प्रेमबल से उनके मन और आत्मा को ऐसे मोह लिया कि उनकी आत्माएं श्रीकृष्णजी की आत्मा में मिलकर एक हो गयी । …

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महर्षि सौभरि की जीवन गाथा

Meh Rishi Sobheri Ki Jeevan Gatha Story

वासना का राज्य अखण्ड है । वासना का विराम नहीं । फल मिलने पर यदि एक वासना को हम समाप्त करने में समर्थ भी होते हैं तो न जाने कहां से दूसरी और उससे भी प्रबलतर वासनाएं पनप जाती हैं । प्रबल कारणों से कतिपय वासनाएं कुछ काल के लिये लुप्त हो जाती हैं, परंतु किसी उत्तेजक कारण के आते …

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