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आरती – जय जगदीश हरे
जय जगदीश हरे प्रभु ! जय जगदीश हरे ! मायातीत, महेश्वर, मन-बच-बुद्धि परे ॥टेक॥ आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी । अतुल, अनंत, अनामय, अमित शक्ति-राशी ॥१॥ जय० अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी । सत-चित-सुखमय, सुंदर, शिव, सत्ताधारी ॥२॥ जय० विधि, हरि, शंकर, गणपति, सूर्य, शक्तिरूपा । विश्व-चराचर तुमही, तुमही जग भूपा ॥३॥ जय० माता-पिता-पितामह-स्वामिसुह्रद भर्ता । विश्वोत्पादक-पालक-रक्षक-संहर्ता ॥४॥ जय० …
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