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मन बड़ा ही प्रबल है

मन बड़ा ही प्रबल है। जन्म-जन्मसे वासनाओंके संस्कार चित्तमें दबे पड़े हैं। कब कौन-सा दोष, कौन सी वासना भड़क उठेगी-इसका कुछ ठिकाना नहीं है। जो दोष अपनेमें ढूँढ़ने से भी नहीं जान पड़ते, वे ही समय पाकर इस प्रकार उभड़ पड़ते हैं कि मनुष्य उनका दास सा बन जाता है। सारे संयम, सब विचार धरे रह जाते हैं। अपने बलपर …

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महान संगीतकार, रवींद्र जैन के बारे में 10 अज्ञात तथ्य

ravinder jain

महान संगीतकार रवींद्र जैन के बारे में 10 अज्ञात तथ्य सौदागर से विवाह तक, जैन ने राजश्री फिल्म्स के साथ 20 एल्बमों के लिए संगीत तैयार किया। 40 साल से अधिक के करियर में, जैन ने 150 से अधिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया, जिनमें राम तेरी गंगा मैली, सौदागर, विवाह, हिना और कई अन्य शामिल हैं। जैन का …

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परमात्मा कहां है?

हसीद फकीर हुआ, बालसेन। उससे मिलने कुछ औरहसीद फकीर आए हुए थे। चर्चा चल पड़ी—— एक बड़ी दार्शनिक चर्चा ——परमात्मा कहां है?किसी ने कहा, पूरब में, क्योंकि पूरब से सूरज ऊगता है। और किसी ने कहा कि जेरूसलम में, क्योंकि यहूदी ही परमात्मा के चुने हुए लोग हैं, और परमात्मा ने ही मूसा के द्वारा यहूदियों को जेरूसलम तक पहुंचाया। …

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अन्यों का विचार करने का महत्व !

बहुत समय पहले की बात है । एक विख्यात गुरुदेव का गुरुकुल हुआ करता था । उस गुरुकुल में बडे-बडे राजा-महाराजाओं के पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के पुत्र भी शिक्षा लेते थे । अनेक वर्षोंसे शिक्षा प्राप्त कर रहे कुछ शिष्यों की शिक्षा पूर्ण हो चुकी थी । अब वे सभी बडे उत्साह के साथ अपने अपने घर लौटने …

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गुरुभक्‍त संदीपक !

गोदावरी नदी के तट पर महात्‍मा वेदधर्मजी का आश्रम था । उनके आश्रम में अलग-अलग स्‍थानों से वेद अध्‍ययन करने के लिए विद्यार्थी आते थे । उनके शिष्‍यों में संदीपक नाम का अत्‍यंत बुद्धिमान शिष्‍य था । वह गुरुभक्‍त भी था । वेदों का अभ्‍यास पूर्ण होने पर उन्‍होंने अपने सभी शिष्‍यों को बुलाया और कहा कि, ‘‘मेरे प्रिय शिष्‍यों, …

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सच्ची सेवा का मर्म

सभी धर्मग्रंथों में सेवा-सहायता को सर्वोपरि धर्म बताया गया है। महर्षि वेदव्यास ने अष्टादश पुराणों में लिखा है, ‘परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम्।’ अर्थात् परोपकार पुण्य है और दूसरों को पीडित करना पाप। कुछ प्राप्त करने की इच्छा से की गई सेवा को शास्त्रों में निष्फल बताया गया है। कहा गया है, ‘यदि सेवा कर्तव्यपालन या आत्मिक प्रसन्नता के लिए की …

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संसार में किस तरह के इन्सान को मुक्ति मिलती है

what-kind-of-person-gets-freedom-in-the-world

एक महात्मा था, उनके एक शिष्य ने सवाल किया कि संसार में किस तरह के इन्सान को मुक्ति मिलती है ? महात्मा अपने शिष्य को तेज बहाव की नदी पर लेकर गये और जाल डालकर मछलियों को पकडने के लिए कहा। शिष्य ने नदी में जाल फेंका और कुछ मछलियाँ जाल में फंस गई।फिर महात्मा ने शिष्य से सवाल किया …

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अच्छे अच्छे महलों मे भी एक दिन कबूतर अपना घोंसला बना लेते है

even-in-good-palaces-pigeons-make-their-nest-one-day

सेठ घनश्याम के दो पुत्रों में जायदाद और ज़मीन का बँटवारा चल रहा था और एक चार पट्टी के कमरे को लेकर विवाद गहराता जा रहा था , एक दिन दोनो भाई मरने मारने पर उतारू हो चले , तो पिता जी बहुत जोर से हँसे। पिताजी को हँसता देखकर दोनो भाई लड़ाई को भूल गये, और पिताजी से हँसी …

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हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है

what-is-the-secret-to-always-be-happy

एक समय की बात है, एक गाँव में महान ऋषि रहते थे| लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे और ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे| एक दिन एक व्यक्ति, ऋषि के पास आया और ऋषि से एक प्रश्न पूछा| उसने ऋषि से पूछा कि “गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है (What …

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