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अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो,

the-love-of-krishna-and-sudama-was-very-deep

अरे द्वारपालो  कन्हैया से कह दो, के द्वार पे सुदामा ग़रीब आगेया है. के द्वार पे सुदामा ग़रीब आगेया है. भटकते भटकते ना जाने कहा से, भटकते भटकते ना जाने कहा से, तुम्हारे महल के करीब आगेया है. तुम्हारे महल के करीब आगेया है. ऊओ…अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो, के द्वार पे सुदामा ग़रीब आगेया है. के द्वार पे …

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मुरलीधर गोपाला घनश्याम नंद के लाला

Murlidhar Gopala Ghanshyam Nand Ke Lala Bhajan

मुरलीधर गोपाला घनश्याम नंद के लाला जाग पालक तू रास रचाइया, गोवर्धन गिरिधारी कितने नाम तेरे नटवर तू सावल कृष्णा मुरारी मोर मुकुट मन्हार लेवात बलिहारी हर ब्रिज बाला मुरली धार गोपाला, घनश्याम नँदके लाला ||1|| तूही सागर मे रमता तूही धरती पाताल ज़ल्मे नाभमए और जगतमे तेरी जाई जाई कार मेरे मान मंदिर मे स्वामी, तुझसे ही उजियला मुरली …

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भगवान शिव के लिए माता पार्वती ने किया था घोर तप

Bhagwan Shiv Ke liye

शिवपुराण में कथा है कि ब्रह्माजी के आदेशानुसार भगवान शंकर को वरण करने के लिए पार्वती ने कठोर तप किया था। ब्रह्मा के आदेशोपरांत महर्षि नारद ने पार्वती को पंचाक्षर मंत्र ‘शिवाय नमः’ की दीक्षा दी। दीक्षा लेकर पार्वती सखियों के साथ तपोवन में जाकर कठोर तपस्या करने लगीं। उनके कठोर तप का वर्णन शिवपुराण में आया है। माता-पिता की …

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वेदवती का रावण को श्राप

vedvati ka ravan ko shrap Story

  राजा धर्मद्वज का कुशध्वज नामक एक धर्मात्मा भाई था। उसका विवाह मालावती नामक युवती से हुआ। धर्मध्वज के भांति कुशध्वज भी भगवती जगदम्बा का अनन्य भक्त था। वह प्रतिदिन उनके मायाबीज मंत्र का जाप करता था। भगवती कि कृपा से कुशध्वज के घर एक सुन्दर कन्या उत्पन्न हुई। वह कन्या महालक्ष्मी का अंश थी। जन्म लेते ही वह कन्या …

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भक्ति की अद्भुत पराकाष्ठा की मिसाल भगवान हनुमान

bhakti ka adbhut prakashta story

लंका मे रावण को परास्त करने के बाद श्रीराम माता सीता लक्ष्मण और हनुमान के साथ अयोध्या लौट चुके थे। प्रभु राम के आने की खुशी में पूरे अयोध्या में हर्षोल्लास का माहौल था। राजमहल में राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थी। राज्याभिषेक के बाद जब लोगों को उपहार बांटे जा रहे थे तभी माता सीता ने हनुमान जी से …

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माता सीता के स्वयंवर की कथा

Mata Sita Ke svemver Ki katha

  सीता के स्वयंवर की कथा वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस के बालकांड सहित सभी रामकथाओं में मिलती है। वाल्मीकि रामायण में जनक द्वारा सीता के लिए वीर्य शुल्क का संबोधन मिलता है। जिसका अर्थ है राजा जनक ने यह निश्चय किया था कि जो व्यक्ति अपने पराक्रम के प्रदर्शन रूपी शुल्क को देने में समर्थ होगा, वही सीता से …

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कच्छपावतार

kachpatvar

पुराने समय की बात है। देवताओं और राक्षसों में आपसी मतभेद के कारण शत्रुता बढ़ गयी। आये दिन दोनों पक्षों में युद्ध होता रहता था । एक दिन राक्षसो के आक्रमण से सभी देवता भयभीत हो गए और ब्रह्मा जी के पास गए। ब्रह्मा जी के परामर्श के बाद वे जगद्गुरु की शरण में जाकर प्रार्थना करने लगे। देवताओं की …

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माखन लेने की अनोखी रीति

Agar Shyam Sunder Ka Shara Bhajan

एक दिन माता यशोदा दही मथकर माखन निकाल रहीं थीं। अचानक मां को आनन्द देने के लिए बलराम और श्याम उनके निकट पहुंच गए। कन्हैया ने मां की चोटी पकड़ ली और बलराम ने मोतियों की माला- दोनों मां को अपनी तरफ खींचने का प्रयास करने लगे। बलराम कहते थे, मां तुम पहले मेरी सुनों! और कन्हैया कहते थे कि …

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अभिमन्यु महाभारत महाकाव्य का अद्भुत पात्र है

Abhimanu Mahabharat Mahakavye

अर्जुन एवं सुभद्रा का पुत्र अभिमन्यु महाभारत महाकाव्य का अद्भुत पात्र है। भगवान श्रीकृष्ण का यह भानजा अर्जुन के समान ही श्रेष्ठ धनुर्धन था। यह वीर्य में युधिष्ठिर के समान, आचार में श्रीकृष्ण के समान, भयंकर कर्म करने वालों में भीम के समान, विद्या- पराक्रम में अर्जुन के समान था। अभिमन्यु का विवाह महाराज विराट की पुत्री उत्तरा के साथ …

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कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावे

raghubar tumako meree laaj

कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावे सुनयना रानी अपनी लली को दुलरावे मुख चू्मे और कण्ठ लगावे मन में मोद में मनावे कौशल्या रानी मन में मोद में मनावे शिव ब्रह्मा जाको पार न पावे निगम नेति कहि गावे कौशल्या रानी निगम नेति कहि गावे हरि सहचरि बड़ भाग्य निराली अपनी गोद खिलावे कौशल्या रानी अपनी गोद खिलावे wish4me In …

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