भारतीय संस्कृति में संस्कार का साधारण अर्थ किसी दोषयुक्त वस्तु को दोषरहित करना है । अर्थात् जिस प्रक्रिया से वस्तु को दोषरहित किया जाएं उसमें अतिशय का आदान कर देना ही ‘संस्कार’ है । संस्कार मन:शोधन की प्रक्रिया हैं । गौतम धर्मसूत्र के अनुसार संस्कार उसे कहते हैं, जिससे दोष हटते हैं और गुणों की वृद्धि होती है । हमारे …
Read More »Gyan Ganga
Varieties of Yoga
just as all rivers end up in the ocean, all yoga ends up raising the kundalini. What is the kundalini? It is the creative potential of the human being. This chapter includes . . . The Varieties of Yoga Yogi Bhajan on Kundalini Yoga & Hatha Yoga What is Raj Yoga and What Does it Have to do with Kundalini …
Read More »भगवान श्रीकृष्ण
श्रीविष्णु भगवान के मुख्य दस अवतारों में श्रीकृष्णावतार को जो महत्त्व प्राप्त है, वह अन्य किसी अवतार को नहीं है । कुछ लोग यह शंका उठाते हैं कि ‘पूर्णकाम’ अजन्मा भगवान अवतार क्यों लेते हैं ? इसका समाधान स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के वचन से ही हो जाता है । पानी में डूबते हुए अनन्यगति बालक को देखकर वत्सल पिता प्रेमविह्वल …
Read More »कृष्णावतार पर वैज्ञानिक दृष्टि
‘कृष्णास्तु भगवान स्वयम्’ श्रीकृष्णचंद्र साक्षात् भगवान परमेश्वर परब्रह्म हैं – यह आर्यजातिका अटल विश्वास है । श्रीकृष्णचरण से ही भक्तिमंदाकिनी का सुधानिर्झर प्रवाहित होकर शांतिमय प्रवाह से सम्पूर्ण जगत को आप्लावित करता हुआ ब्रह्मांड को वेष्टित कर वहीं पहुंचकर लीन होता है, जिसमें डूबकर सनातन धर्मावलम्बी समाज सदा से अपने – आपको सफलजन्मा कृतकृत्य बनाता आया और आज भी बना …
Read More »त्रिपुरुष – विज्ञान
भगवान कृष्ण ने भगवद्गीता में अपने – आपको अव्यय आत्मा कहा है । इसी अव्ययात्म – स्वरूप का विशेषरूप से स्पष्टीकरण है – लोक में दो पुरुष हैं – एक क्षर, दूसरा अक्षर । इंद्रियों से जो जाने जाते हैं वे सब भूत क्षर हैं, उनमें कूटस्थ – नित्यरूप से रहने वाला – विकृत न होने वाला पुरुष अक्षर कहा …
Read More »What is Yoga?
What is light? Light is where you can see everything. Light is where darkness disappears. Who is enlightened? One who can see everything: good, bad, and neutral. One who sees all and sees God. If you cannot see God in all, you cannot see God at all. Those who seek God inside, find it. Those who seek God outside, waste …
Read More »श्रीकृष्ण अवतार
श्रीकृष्णावतार – प्रभु का साक्षात स्वरूप यह ईश्वर और अवतार का रहस्य दृष्टि में रखकर अब भगवान श्रीकृष्ण के चरित्रों की आलोचना कीजिए, तो स्फुटरूप से भासित हो जाएंगा कि वे ‘पूर्णावतार’ हैं । दुराग्रह छोड़ दिया जाएं तो विवश होकर कहना ही पड़ेगा कि ‘कृष्णस्तु भगवान्स्वयम्’ (श्रीकृष्ण साक्षात् भगवान – परब्रह्म परमेश्वर हैं ) । पहले बुद्धि के …
Read More »महात्मा की कृपा
पुण्यभूमि आर्यावर्त के सौराष्ट्र – प्रांत में जीर्णदुर्ग नामक एक अत्यंत प्राचीन ऐतिहासिक नगर है, जिसे आजकल जूनागढ़ कहते हैं । भक्तप्रवर श्रीनरसिंह मेहता का जन्म लगभग सं0 1470 में इसी जूनागढ़ में एक प्रतिष्ठित नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम था कृष्णदामोदर दास तथा माता का नाम लक्ष्मी गौरी । उनके एक और बड़े …
Read More »संसारी – व्यवसायी में भेद
बुद्धि दो तरह की होती है – अव्यवसायात्मिका और व्यवसायात्मिका । जिसमें सांसारिक सुख, भोग, आराम, मान आदि प्राप्त करने का ध्येय होता है, वह बुद्धि ‘अव्यवसायात्मिका’ होती है । जिसमें समता की प्राप्ति करने का, अपना कल्याण करने का ही उद्देश्य रहता है, वह बुद्धि ‘व्यवसायात्मिका’ होती है । अव्यवसायात्मिका बुद्धि अनंत होती है और व्यवसायात्मिका बुद्धि एक होती …
Read More »कर्मयोग
जन्म – जन्मांतर में किये हुए शुभाशुभ कर्मों के संस्कारों से यह जीव बंधा है तथा इस मनुष्य शरीर में पुन: अहंता, ममता, आसक्ति और कामना से नए – नए कर्म करके और अधिक जकड़ा जाता है । अत: यहां इस जीवात्मा को बार – बार नाना प्रकार की योनियों में जन्म – मृत्युरूप संसारचक्र में घुमाने के हेतुभूत जन्म …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…