कोलकाता के टांगरा में ये 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर स्थित है. इस मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर की एक दिलचस्प बात ये है कि यहां आने वाले मां के भक्तों को प्रशाद में नूडल, चावल और सब्जियों से बनी …
Read More »Gyan Ganga
कर्तव्यपरायणता का अद्भुत आदर्श
प्राचीन काल में सर्वसमृद्धिपूर्ण वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का एक धर्मात्मा राजा था। एक दिन उसके दरबार में वीरवर नाम का एक गुणी व्यक्ति अपनी पत्नी, कन्या एवं पुत्र के साथ वृत्ति के लिए उपस्थित हुआ। राजा ने उसकी विनयपूर्ण बातों को सुनकर प्रतिदिन एक सहस्त्र स्वर्णमुद्रा का वेतन नियत कर सिंहद्वार के रक्षक के रूप में उसकी नियुक्ति …
Read More »नवरात्र में कलश स्थापना (प्रतिपदा)
चैत्र के नवरात्र में शक्ति की उपासना तो प्रसिद्ध ही है, साथ ही शक्तिधर की उपासना भी की जाती है । उदाहरणार्थ एक ओर देवीभागवत, कालिकापुराण, मार्कण्डेयपुराण, नवार्णमंत्र के पुरश्चरण और दुर्गापाठ की शतसहस्त्रायुतचण्डी आदि होते हैं तो दूसरी ओर श्रीमद्भागवत, अध्यात्म – रामायण, वाल्मीकीय रामायण, तुलसीकृत रामायण, राममंत्र पुरश्चरण, एक तीन पांच सात दिन की या नवाह्निक अखण्ड रामनामध्वनि …
Read More »नवरात्र में क्यों करें घटस्थापन ?
किसी भी पूजन कार्यक्रम में घटस्थापना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । घटस्थापना के बिना किसी भी पूजन कार्यक्रम को सफल नहीं किया जा सकता है । आइये जानते हैं आखिर क्यों करते है घटस्थापना । 1- मंगलमयी कार्यक्रमों में वेद-पुराणों के अनुसार घट में इस सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा का निवास हैं, घटस्थापना से सभी देवी-देवताओं की पूजा …
Read More »चक्रिक भील
अर्थात् ‘ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र और जो अन्य अन्त्यज लोग हैं, वे भी हरिभक्तिद्वारा भगवान की शरण होने से कृतार्थ हो जाते हैं, इसमें संशय नहीं है । यदि ब्राह्मण भी भगवान के विमुख हो तो उसे चाण्डाल से अधिक समझना चाहिए और यदि चाण्डाल भी भगवान का भक्त हो तो उसे भी ब्राह्मण से अधिक समझना चाहिये ।’ द्वापरयु …
Read More »नवरात्र व्रत की कथा
प्राचीन काल में एक सुरथ नाम का राजा हुआ करता था । उसके राज्य पर एक बार शत्रुओं ने चढ़ाई कर दी । मंत्री गण भी राजा के साथ विश्वासघात करके शत्रु पक्ष के साथ जा मिले । मंत्जिसका परिणाम यह हुआ कि राजा परास्त हो गया, और वे दु:खी और निराश होकर तपस्वी वेष धारण करके वन में ही …
Read More »नव वर्ष का प्रारंभ प्रतिपदा से ही क्यों?
भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है । आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यावहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है । इसे राष्ट्रीय गौरवशाली परंपरा का प्रतीक माना जाता है …
Read More »नवरात्र व्रत की कथा
प्राचीन काल में एक सुरथ नाम का राजा हुआ करता था । उसके राज्य पर एक बार शत्रुओं ने चढ़ाई कर दी । मंत्री गण भी राजा के साथ विश्वासघात करके शत्रु पक्ष के साथ जा मिले । मंत्जिसका परिणाम यह हुआ कि राजा परास्त हो गया, और वे दु:खी और निराश होकर तपस्वी वेष धारण करके वन में ही …
Read More »उगादि
हिंदू नवसंवत्सर यानी चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को हम कई नामों से जानते हैं। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा तो दक्षिण भारत में उगादि (युगादि) के रुप में नये साल का स्वागत करते हैं । उगादि को युगादि, इसलिए भी कहते हैं क्योंकि यह युग+आदि से मिलकर बना है । युगादि का अर्थ युग का प्रारंभ होता है । उगादि …
Read More »मुक्ति के लिये साधन की आवश्यकता
भगवान सर्वज्ञ हैं, सब कुछ जानते हैं, परंतु किसकी मुक्ति होगी इसको भगवान भी पहले से नहीं जानते हैं, यदि पहले से ही जान जाएं तो प्रयत्न की क्या आवश्यकता है ? भगवान तो जानते हैं फिर प्रयत्न क्या हो ? यह बात नहीं कि भगवान जान नहीं सकते, जीवों को अवसर दिया है, यदि भगवान निश्चित कर दें कि …
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