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Gyan Ki Baat

भूत की कहानी : भूतिया कुर्सी!!

सालों पहले रामनगर गांव के पास के घने जंगल में राजू नामक तांत्रिक रहता था। उसे अपनी विद्या और ज्ञान पर खूब घमंड था। उसका कहना था कि वो चाहे तो सभी को अपने काबू में कर सकता है। साथ ही तंत्र विद्या की मदद से किसी को जान से मारने की कला भी उसे खूब आती थी। उसी दौरान …

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भूत की कहानी : भाग्य वाले का भूत हल जोतता है!!

सुदूर एक गांव में मोहन नाम का पहलवान रहता था, जिसके पास 5 भैंसें थीं। दिनभर भैंसों की देखभाल करना और उनका दूध पीना ही मोहन की दिनचर्या थी। भैंसों का दूध पीते रहने के कारण वह काफी बलवान हो गया था। मोहन अपने बचाव और सहारे के लिए एक लोहे की छड़ हमेशा साथ रखता था। इस कारण कोई …

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भूत की कहानी : भूतिया पेड़!!

रोनक पुर नाम के एक शहर में राजा रोनकसिंह का राज हुआ करता था। वो हमेशा अपनी प्रजा के हित में कार्य किया करते थे। वहां की प्रजा बहुत खुश रहती थी। एक दिन गिद्ध आकाश में भूतिया पेड़ के बीज लेकर उड़ रहा था। जैसे ही गिद्ध रोनक पुर पहुंचा, तो उसके मुंह से एकदम बीज रोनकपुर के बीचों-बीच …

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वो बंद दरवाजे बुलाते हैं पर कोई नहीं आता

किसी दिन सुबह उठकर एक बार इसका जायज़ा लीजियेगा कि कितने घरों में अगली पीढ़ी के बच्चे रह रहे हैं? कितने बाहर निकलकर नोएडा, गुड़गांव, पूना, बेंगलुरु, चंडीगढ़,बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बड़ौदा जैसे बड़े शहरों में जाकर बस गये हैं? कल आप एक बार उन गली मोहल्लों से पैदल निकलिएगा जहां से आप बचपन में स्कूल जाते समय या दोस्तों …

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दो तोते-भाइयों की कथा!!

एक बार किसी ने दो तोते-भाइयों को पकड़ कर एक राजा को भेंट में दिया। तोतों के गुण और वर्ण से प्रसन्न हो राजा ने उन्हें सोने के पिंजरे में रखा, उनका यथोचित सत्कार करवाया और प्रतिदिन शहद और भुने मक्के का भोजन करवाता रहा। उन तोतों में बड़े का नाम राधा और छोटे का नाम पोट्ठपाद था। एक दिन …

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गौरवशाली अतुल्य भारत

*हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था, तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था ताकि बैल आराम से यह नित्यकर्म कर सके,यह आम चलन था। **हमनें (ईश्वर वैदिक) यह सारी बातें बचपन में स्वयं अपनी आंखों से देख हुई हैं। जीवों …

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महाकपि की सूझ-बूझ!!

कभी एक राजा के बगीचे में अनेक बंन्दर रहते थे और बड़ी स्वच्छंदता से वहाँ कूद-फांद करते थे। एक दिन उस बगीचे के द्वार के नीचे राज-पुरोहित गुजर रहा था। उस द्वार के ऊपर एक शरारती बंदर बैठा था। जैसे ही राज-पुरोहित उसके नीचे आया उसने उसके गंजे सर पर विष्ठा कर दी। अचम्भित हो पुरोहित ने चारों तरफ देखा, …

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जातक कथा: महाकपि का बलिदान!!

हिमालय के जंगल में ऐसे कई पेड़-पौधे हैं, जो अपने आप में अनोखे हैं। ऐसे पेड़-पौधे और कही नहीं पाए जाते। इन पर लगने वाले फल और फूल सबसे अलग होते हैं। इन पर लगने वाले फल इतने मीठे और खुशबूदार होते हैं कि कोई भी इन्हें खाए बिना रह नहीं सकता। ऐसा ही एक पेड़ नदी किनारे था, जिस …

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सुनहरे पँखों वाले हँस की कहानी!!

वाराणसी में कभी एक कर्त्तव्यनिष्ठ व शीलवान् गृहस्थ रहा करता था । तीन बेटियों और एक पत्नी के साथ उसका एक छोटा-सा घर संसार था । किन्तु अल्प-आयु में ही उसका निधन हो गया । मरणोपरान्त उस गृहस्थ का पुनर्जन्म एक स्वर्ण हंस के रुप में हुआ । पूर्व जन्म के उपादान और संस्कार उसमें इतने प्रबल थे कि वह …

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जातक कथा: दो हंसों की कहानी!!

बहुत पुरानी बात है हिमालय में प्रसिद्ध मानस नाम की झील थी। वहां पर कई पशु-पक्षियों के साथ ही हंसों का एक झुंड भी रहता था। उनमें से दो हंस बहुत आकर्षक थे और दोनों ही देखने में एक जैसे थे, लेकिन उनमें से एक राजा था और दूसरा सेनापती। राजा का नाम था धृतराष्ट्र और सेनापती का नाम सुमुखा …

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