चलो चलो रे श्याम के द्वार होली खेलेगे
उड़े रंगों की छावे बहार के होली खेले गे
संवारे सलोने को रंग मैं लगाऊ गी
काले को आज मैं तो लाल बनाऊगी
प्यारा प्यारा आये ये त्यौहार के होली खेले गे
उड़े रंगों की छावे बहार के होली खेले गे
रंग गुलाल की भर ली है झोली
संग ले जाऊ गा भगतो की टोली
मने पिचकारी कर ली तयार के होली खेले गे
श्याम संग होली का बड़ा ही आनंद है
अरे केसरिया रंग मेरे श्याम को पसंद है
गोर मुखड़े को रंगु बार बार
उड़े रंगों की छावे बहार,
के होली खेले गे
भीम सेन फागुन में आवे हर साल है
भगतो के संग देखो करता धमाल है
गुण गाता है राम अवतार होली खेलेगे……………
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