छुप छुप खड़े हो जरुर कोई बात है
दही की मटकियाँ में डारो काहे हाथ है,
आँगन में छीके से मटकी उतार के
काहा चले कान्हा तुम घर को बिगाड़ के,
गावल ने झपट पकड़ लीनो हाथ है,
दही की मटकियाँ में डारो काहे हाथ है,
सुन ऋ यशोदा मैया तेरो ये कन्हियाँ घेर आयो मटकी खोल आयो गईयाँ,
घर को बिगाड़ दियो कियो उत्पात है,
दही की मटकियाँ में डारो काहे हाथ है,
सुन री यशोदा मइया मेरो न कसूर है
हाथ मेरो छोटे छोटे छीको बडो दूर है
घर में भी कन्हियाँ ने मचाओ उत पात है,
दही की मटकियाँ में डारो काहे हाथ है,
एसी एसी बात कान्हा सुबहो और शाम करे,
निर्धन को धन देवे तुत लाके बात करे
माखन को चोरवा को नाम दीना नाथ है
दही की मटकियाँ में डारो काहे हाथ है,,,,,,,,
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