अरे बन दही मटकियाँ फोड़ी मात सुन बात हमारी रे,
वे कान्हा जोडू दोनों हाथ सुन
मान जा सुन ले मेरी बात
अरे क्यों बहिया रहो मरोड़
मात सुन बात हमारी रे,
कान्हा साँची बताये दई तोहे
छेड़ रहेया क्यों मार्ग में मोहे,
अरे जाने मटकी दाहिये फोड़े
मात सुने बात हमारी
जुलम जाने कर ही डारो रे
लुट लेयो माखन सारो रे,
आरे जाने चुनर दहिये फाड़
मात सुन बात हमारी रे,
सखी सब ब्रिज की आवे रे
पकड़ यशोदा ढंग लावे रे
अब ये लता कहे करे जर जोरी
मात सुन बात हमारी रे,,,,,,,,
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