दरस दिखादो ना कन्हैया, दरस दिखादो ना
कि जन्मों से आस लगी, अब तुम चले आओ ना
दरस दिखादो ना गिरधारी, दरस दिखादो ना
कि जन्मों से आस लगी, अब तुम चले आओ ना……
तुमको ही चाहूँ, तुमको ही पूजूं,
और किसी को ना इस दिल में बसाऊं,
और किसी को ना इस मन में बसाऊं
शरण तिहारी हूँ कन्हैया, शरण तिहारी हूँ
कि जन्मों से आस लगी, अब तुम चले आओ ना………
तुम हो अनाथ के नाथ गोसाईं, दीनन के हो तुम सदा ही सहाई
कष्टों को मिटादो ना कन्हैया, कष्टों को मिटादो ना
कि जन्मों से आस लगी, अब तुम चले आओ ना……
दरस दिखादो ना कन्हैया, दरस दिखादो ना
कि जन्मों से आस लगी, अब तुम चले आओ ना………..
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