एह दो जहान के मालिक मेरी खता बता दे
चरणों से दूर कान्हा तूने क्यों किया बता दे
एह दो जहान के मालिक मेरी खता बता दे
जीने को जी रहा हु
लेकिन मजा नही है
तुमसे जो दूरिया है क्या ये सजा नही है
मुझे थाम ले दयालु ये फांसले मिटा दे
एह दो जहान के मालिक मेरी खता बता दे
दुनिया की दोलतो की चाहत नही है दाता
चरणों में जगह दो देदे मेरे विध्याता
हाथो को मेरे सिर पे जरा प्यार से फिर दे
एह दो जहान के मालिक मेरी खता बता दे
तेरे पत पे चल रहा हु
आशा है तू मिलेगा
उम्मीद का ये दीपक इक दिन प्रभु जले गा
तेरे हर्ष के हिरदये का अंधियारा तू मिटा दे
एह दो जहान के मालिक मेरी खता बता दे……..
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