मुझे माफ़ कर दो सुवर्णा अब मैं आ गया हूँ हमेशा के लिए… अब हम सब साथ रहेंगे हमेशा मैं तुम और हमारे बच्चे…
हां यही तो चाहती थी मैं कि हम सब साथ रहें, हंसे खेले खाये… बस ये छोटा सा सपना संजोया था मैंने जो कि हर स्त्री संजोती होगी।शादी के सात साल बाद तुमने मुझे और मेरे बच्चों को बस इसीलिए छोड़ दिया क्योंकि तुम्हारा दिल किसी और से लग गया।
मैं तो पराए घर से आई थी तुम्हारे अपने मां बाप जो तुम्हारे जाने के बाद से अपनी आखिरी सांस तक इसी उम्मीद में जिये की उनका खून उनका अपना बेटा लौटकर आएगा,पर तुमने उनका हालचाल जानना भी जरूरी नही समझा।
अब जब हमने हालात से समझौता करके तुम्हारे बिन जीना सीख लिया तो तुम फिर चले आये हमारे जख्मों पर नमक छिड़कने।
आज तुम वापस आये हो, इसलिए नही कि तुम्हे ‘मेरी या बच्चों की याद खींच लाई।’ बल्कि इसलिए कि अब तुम्हारी नौकरी नही रही, तुम्हारा शरीर भी रोगी हो चला है इसलिए तुम्हारी प्रेयसी भी तुम्हे छोड़ गई।
मेरी जिंदगी में तुम्हारी कोई जगह शेष नही रह गयी है इसलिए तुम्हारी पत्नी बनकर सेवा करने का तो सवाल ही नही उठता।हां ये संस्था ‘बसेरा’ मैं ही चलाती हूं बेसहारा लोगों को सहारा देती है।उनका ख्याल रखती है जिनका इस दुनिया मे कोई नही है। एक अनाथ की हैसियत से यंहा रहना चाहो तो, कुछ आवश्यक कागजी कार्यवाही पूरी करके रह सकते हो।
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