गोविंदा रे हरि गोपाला
दूध पियो रे हरि गोविंदा
पत्थर की मुरती दूध ना पीवे
करुणा करि करि नामदेव रोवे
गोविंदा रे हरि गोपाला
दूध पियो रे हरि गोविंदा
पत्थर से तोड़ खंड बंड रे करू
यही रे पत्थर से मै भी मरू
गोविंदा रे हरि गोपाला
दूध पियो रे हरि गोविंदा
धुन- बचपन की मोहब्बत को
भगवान मेरी नईया, उस पार लगा देना,
अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ll
हम दीन दुखी निर्बल, नित नाम रहे प्रति पल l
यह सोच दरस दोगे, प्रभु आज नही तो कल l
जो बाग लगाया है, फूलों से सजा देना,
भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तुम शांति सुधाकर हो, तुम ज्ञान दिवाकर हो l
मम हँस चुगे मोती, तुम मान सरोवर हो l
दो बूँद सुधा रस की, हमको भी पिला देना,
भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रोकोगे भला कब तक, दर्शन को मुझे तुमसे l
चरणों से लिपट जाऊँ, वृक्षों से लता जैसे l
अब द्वार खड़ी तेरे, मुझे राह दिखा देना,
भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मँझधार पड़ी नईया, डगमग डोले भव में l
आओ त्रिशला नंदन, हम ध्यान धरे मन में l
अब तनवर करे विनती, मुझे अपना बना लेना,
भगवान मेरी नईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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