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परिश्रम का फल !!

एक राजा सदैव दुखी रहता था। क्योंकि उसके राज्य के लोग मेहनत करने से कतराते थे। वे बड़े आलसी और कामचोर थे। जब राजा अपने राज्य में भ्रमण के लिए निकलता तो वह देखता कि उसके राज्य की सड़कें कूड़े कचड़े और पत्थरों से भरी पड़ी हैं।

लोग साफ सफाई नहीं करते। सबकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। क्योंकि वे मेहनत नहीं करना चाहते। राजा उनको सुधारना चाहते था। इसके लिए उसने एक उपाय सोचा। एक दिन बहुत सबेरे वह अपने मंत्री के साथ राज्य की मुख्य सड़क पर पहुँचा।

वहां सड़क के बीचोंबीच पड़े एक बड़े से पत्थर के नीचे उसने सोने की मोहरों से भरी एक थैली छुपा दी और चुपचाप चला आया। पूरे दिन उस रास्ते से बहुत से लोग गुजरे लेकिन किसी ने उस पत्थर को सड़क से हटाने की कोशिश नहीं की।

सभी लोग उस पत्थर के बगल से निकल जाते। शाम हो गयी लेकिन वह पत्थर वहीं का वहीं रहा। शाम के समय राजा भेष बदलकर अपने मंत्री के साथ फिर उस जगह पर पहुंचा। उस पत्थर को वहीं पड़े देखकर उसे बड़ा दुख हुआ।

उसने रास्ते से गुजर रहे लोगों से उस पत्थर को हटाने को कहा। लेकिन किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। तब उसने मंत्री के साथ मिलकर पत्थर को हटाना शुरू कर दिया। दो लोगों को पत्थर हटाते देखने के लिए लोग इकट्ठा हो गए। क्योंकि उनके लिए यह अनोखी बात थी।

जब राजा ने पत्थर हटाया तो उसके नीचे से सोने के मोहरों से भरी थैली निकली। जिसे देखकर लोग आश्चर्य चकित हो गए। तब राजा ने उनसे कहा, “यदि तुम लोग इस पत्थर को हटाते तो यह थैली तुम्हे मिलती। लेकिन तुम लोग मेहनत से डरते हो।”

मेहनती लोगों को ही जीवन में सुख सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए मेहनत करना प्रारंभ करो। फिर देखना तुम्हारा जीवन बदल जायेगा।” राजा की बात सुनकर लोगों को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने मेहनत करने का निश्चय किया।

सीख- Moral Of Story

परिश्रम सफलता की कुंजी है। इसलिए हमें मेहनत से घबराना नहीं चाहिए।

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