हरि तुम हरो जन की भीर,
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥
भगत कारण रूप नरहरि धर्यो आप सरीर ॥
हिरण्यकश्यप मारि लीन्हो धर्यो नाहिन धीर॥
बूड़तो गजराज राख्यो कियौ बाहर नीर॥
दासी मीरा लाल गिरधर चरणकंवल सीर॥
मीरा बाई पद का हिंदी अनुवाद : परम श्री कृष्ण भक्त मीरा बाई इश्वर से विनती करती हैं की हे इश्वर आप ही हम भक्तों की लाज रखो, आप ही हम भक्तों के संकटों को दूर करो। हरी से विनती है की जैसे आपने दौपदी की लाज रखी और दुष्ट दुषाषन के वस्त्र हरण के वक़्त आपने ही वस्त्र को लम्बा किया था. भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए आपने नर हरी का रूप धारण किया था और आपने ही भगवान इंद्र के वाहन ऐरावत हाथी को मगरमच्छ के चंगुल से मुक्त किया था. ऐसे ही जैसे आपने द्रोपदी, भक्त प्रहलाद और गजराज की लाज बचाई थी वैसे ही आप मेरे (मीरा बाई) के संकटों को दूर कर दो.
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