एक जंगल में हिरण का परिवार रहता था। उस हिरण एक प्यारा सा सुंदर सा बच्चा था। एक दिन खरगोश से दौड़ हुई , हिरण का बच्चा खरगोश से आगे भागने लगा। वह जंगल पार कर गया , खेत पार कर गया , नदी भी पार कर गया , पर पहाड़ पार नहीं कर पाया।
चट्टान से टकराकर गिर गया और जोर – जोर से रोने लगा।
बंदर ने उसकी टांग सहलाई पर चुप नहीं हुआ।फिर भालू दादा ने गोद में उठा कर खिलाया उससे भी चुप नहीं हुआ।और सियार ने नाच किया उससे भी चुप नहीं हुआ , फिर हिरण की मां आई उसने उसे प्यार किया और कहा चलो उस पत्थर की पिटाई करते हैं। हिरण का बच्चा बोला नहीं ! वह भी रोने लगेगा।
उसके बाद मां हंसने लगी बेटा हंसने लगा , बंदर हंसने लगा , भालू हंसने लगा सब हंसने लगे।
नैतिक शिक्षा –
बालकों में संवेदना बड़ों से अधिक होती है। उसे बढ़ावा दे।
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