Breaking News

जय हो भोलेनाथ जय हो भंडारी

Shiv shnkar
Shiv shnkar

जय हो भोलेनाथ जय हो भंडारी
जय हो कैलाश पति जय त्रिपुरारी

दुखियो के तूने है काज सवाँरे
जो भी है आया भगवन तेरे द्वारे
कर दिया कल्याण पिता कल्याण कारी
जय हो भोलेनाथ जय हो भंडारी

तेरी जटाओ मैं गंगा का पानी
गंगा के पानी मैं शक्ति रूहानी
मस्तक का चंद्रमा पीड़ा हरे सारी
जय हो भोलेनाथ जय हो भंडारी

तन पे बभूत रमे नागो की माला
दो नैनो में मस्ती तीसरी में ज्वाला
दर्शनों की भीख मांगे तेरे भिखारी
जय हो भोलेनाथ जय हो भंडारी

हंस हंस के धरती का विष पीने वाले
महादेव नीलकंठ जगसे निराले
सृष्टि यह गाये महिमा तुम्हारी
जय हो भोलेनाथ जय हो भंडारी

Check Also

nastik

एक नास्तिक की भक्ति

इस कहानी में हरिराम नामक आदमी के बदलते दृष्टिकोण और उसकी नास्तिकता से बच्चे को दवा देने की भरपूर भावना को दर्शाया गया है।.........