जो घट अंतर हरि सुमिरै .
ताको काल रूठि का करिहै
जे चित चरन धरे ..
हरि सुमिरे
राम सिया राम जय जय राम सिया राम
सहस बरस गज युद्ध करत भयै
छिन एक ध्यान धरै .
चक्र धरै वैकुण्ठ से धायै
बाकी पैंज सरे ..
हरि सुमिरे
राम सिया राम जय जय राम सिया राम
जहँ जहँ दुसह कष्ट भगतन पर
तहं तहँ सार करै .
सूरजदास श्याम सेवै ते
दुष्तर पार करे ..
हरि सुमिरे
राम सिया राम जय जय राम सिया राम
जो घट अंतर हरि सुमिरै .
ताको काल रूठि का करिहै
जे चित चरन धरे ..
हरि सुमिरे
राम सिया राम जय जय राम सिया राम
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