कहाँ पे हैं मेरे घनश्याम राधा रो रो कहती है
राधा रो रो केहती है के राधा रो रो केहती है
सताए उनकी वो मुस्कान राधा रो रो केहती है,
कहाँ पे हैं मेरे घनश्याम राधा रो रो कहती है
वो मुरली याद आती है
यो राधा को सताती है
ना जाने है कहा गिरधर अब नही नींद आती है
रुलाये तन से निकले प्राण राधा रो रो कहती है
वो बातो बात में झगड़ा वो माखन का चुरा लेना,
ये राधा बुल न पाए सता कर वो मना लेना
न जाये दिल से उनकी याद
राधा रो रो कहती है……….
तेरी बाँकी अदाओं ने दिल मेरा चुराया है,
ओ राधा रमण किरपा कर तूने अपना बनाया है
तेरी बाँकी अदाओं ने
इक प्यार तेरा पाया जो तो सब जग लागे फीका,
तेरे नाम की माला डाली और तेरे नाम का ही टिका
श्री चरणों की रज को ही मैंने मांग सजाया है
ओ राधा रमण किरपा कर तूने अपना बनाया है
मेरे मन को भाति है वृंदावन की गलियां
दिल करता है के चूम लू तेरी लेलु मैं बलियां,
तेरी माधुरी मूरत को मैंने दिल में वसाया है
ओ राधा रमण किरपा कर तूने अपना बनाया है
बांसुरो के स्वरों ने तो मेरी निंदिया उड़ाई है
तेरी यादो की तन्हाइयो ने सुध बुध विसराई है
गोपाली को तूने ही पागल बनाया है
ओ राधा रमण किरपा कर तूने अपना बनाया है
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