कान्हा गोकुल आजा आके रास रचा जा,
राह देखते है हुई बहुत अभेर अब करो मत देर राह देख ते है
कान्हा गोकुल आजा आके रास रचा जा,
तेरे बिना माखन की मटकी अब तक छीके उपर अटकी
पनियां भरन जब गोपियाँ जाए
मुड मुड तेरी राहे तकती
थोडा माखन खा जा मटकी चटका जा राह देख ते है
हुई बहुत अबेर अब करो मत देर राह देखते है
कान्हा गोकुल आजा आके रास रचा जा,
ग्वाल बाल भी सोच रहे सब गईया चराने क्यों जाए अब
कौन हमारे संग खेलेगा मोहन मुरली वाला नही जब
आके इन्हें समजा जा थोड़ी धीर बंधा जा राह देख ते है
हुई बहुत अबेर अब करो मत देर राह देख ते है
शाम ढले यमुना के तीरे कुक उठे है धीरे धीरे
सर्प के जैसी रात लगे है
बहुत है व्याकुल वंवारा जी रे
मधुवन का नजारा फीका लगता है सारा राह देख ते है
हुई बहुत अभेर अब करो मत देर
कान्हा गोकुल आजा आके रास रचा जा,,,,,,
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