थोडा सा माखन खिला दो न राधा,
मांगू न फिर तुमसे करू न वाधा मटकी को हाथ लगाने न दूंगी
कन्हैया माखन न खाने दूँगी
रोज रोज माखन चुराते हो कान्हा
फोड़ दूंगा मटकी जो दो गे न राधा,
मटकी के पास तुम्हे आने न दूंगी
कन्हैया माखन न खाने दूँगी
मुरली बजाते तुम मटकी गिराते आता है
मजा जब तुम को सताते,
माखन का स्वाद तुम्हे पाने न दूंगी
कन्हैया माखन न खाने दूँगी
करुगी शिकायत मैं मैया से तेरी ऐसा न करना सुनो राधा रानी मेरी
बीस बाल थामा को बचाने न दूंगी
कन्हैया माखन न खाने दूँगी………..
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