हिन्दी सिनेमा और #दूरदर्शन पर केश्टो मुखर्जी द्वारा अभिनीत शराबी के किरदार को देख किसी नें भी नहीं सोचा होगा कि यह शख्स शराब नहीं पीता होगा या वे इतना उच्च शिक्षित होगा,उन्होने अपने अभिनय के दम पर अपने आप को एक हास्य कलाकार के रूप में स्थापित किया,उनका जन्म 1925 में कोलकाता में एक बंगाली परिवार में हुआ था।वह एक उच्च शिक्षित व्यक्ति थे जिन्होने अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की थी…
ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें पहला ब्रेक दिया था “मुसाफिर”(1957) में, उनकी आखिरी फिल्म 1981 में आई “पांच कैदी” थी। अपने 30 साल लंबे फ़िल्मी करियर में उन्होंने तकरीबन 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इनमें से ज्यादा फिल्मों में वह केवल शराबी के रोल में ही दिखाई दिए. वैसे आपको बता दें कि केष्टो की एक्टिंग देखकर आपको भले ही लगे कि वह असल में शराब पिए होंगे लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं था. परदे पर शराबी के किरदार में पॉपुलैरिटी बटोरने वाले केष्टो मुखर्जी असल ज़िंदगी में शराबी नहीं थे और ना ही कभी शराब को हाथ लगाते थे
उन्होंने पहली बार फिल्म मां और ममता में शराबी की भूमिका निभाकर सबका ध्यान खींचा था. यह फिल्म 1970 में रिलीज हुई थी. इसके बाद वह बॉम्बे टू गोवा, पड़ोसन , चुपके-चुपके आदि कई फिल्मों में भी नज़र आए. केष्टो की चर्चित फिल्मों में ज़ंजीर, आप की कसम, शोले जैसी सुपरहिट फिल्मों के नाम भी शामिल हैं.
उनका 2 मार्च, 1982 को एक कार दुर्घटना में निधन हो गया था।
पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…