एक माँ की आखिरी आशा
एक माॅ अपनी नवजात बेटी को हॉस्पिटल की बैंच पर छोड़कर चली गई है , और एक चिट्ठी लिखकर रख गई है , कि मेरी पांच बेटियां हैं और यह मेरी छठी भी बेटी हुई है, और मेरी सांस बहुत कलेश करती हैं। इसलिए मैं अपनी बेटी को छोड़कर जा रही हूं, मेरी मजबूरी को समझें, कृपया करके मेरी बेटी को कोई पाल लेना , यह खबर जब उन्होंने देखी तो मन में विचार आया, कि क्यों ना हम इस बेटी को गोद ले ले, सपना के पति ने कहा चलो हम देख कर आते हैं यह बेटी हमें कहां मिलेगी।
सपना और सपना के पति दोनों शिशु पालन ग्रह में पहुंचे , तो वहां शनिवार पढ़ने के कारण ऑफिस बंद था तो कर्मचारियों ने बताया कि आप सोमवार को आना आपको साहब मिल जाएंगे। और आप उनसे बात कर लेना, तो वो दोनों वहाँ से खुशी खुशी एक उम्मीद के साथ घर लौट आये , उनके पास बेटे तो है उन्होंने सोचा अगर कोई अपनी बेटी को छोड़कर जा रहा है तो चलो हम उसे पाल लेंगे और हमारे बेटों के लिए छोटी बहन हो जाएगी।
यह बात सुनकर बच्चे बहुत खुश हुए कि हमारे पास भी छोटी सी गुड़िया आ जाएगी । दो दिन तक बच्चे सुनहरे सपने बुनते रहे , सोमवार के दिन फिर से दोनों शिशु पालन ग्रह मैं गए थे उन्होंने साफ मना कर दिया की यह बेटी आपको नहीं मिल सकती। आपके पास पहले से ही बच्चे हैं, अगर आप चाहे तो ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं , अगर आपका आवेदन पास कर दिया गया तो शायद आपको बेटी मिल सकती है , अन्यथा नहीं मिल सकती।
यह बात सुनकर उन्हें बहुत बुरा लगा लेकिन कर भी क्या सकते हैं बच्चों को जब यह बात पता चली तो बेचारे बच्चे बहुत दुखी हुए उन्होंने न जाने कितने सुखद सपने दो दिन में संजो लिए थे , कितना अच्छा लग रहा था उन्हें , लेकिन उन बच्चों का मासूम मन दुखी हो गया । वैसे आए दिन बेटियां कूड़े में फेंक दी जाती हैं लेकिन बिना रिश्वत के बेटियां भी गोद नहीं मिलती बेहद दुखी दुख की बात है।
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