गांव के बाहर पीपल बड़ा वृक्ष था। यह वृक्ष 200 साल से अधिक पुराना था। गांव के लोग उस वृक्ष के नीचे नहीं जाते थे। वहां एक भयंकर विषधर सांप रहा करता था। कई बार उसने चारा खा रही बकरियों को काट लिया था।
गांव के लोगों में उसका डर था। गांव में रामकृष्ण परमहंस आए हुए थे।
लोगों ने उस विषधर का इलाज करने को कहा।
रामकृष्ण परमहंस उस वृक्ष के नीचे गए और विषधर को बुलाया। विषधर क्रोध में परमहंस जी के सामने आंख खड़ा हुआ। विषधर को जीवन का ज्ञान देकर परमहंस वहां से चले गए।
विषधर अब शांत स्वभाव का हो गया। वह किसी को काटना नहीं था।
गांव के लोग भी बिना डरे उस वृक्ष के नीचे जाने लगे।
एक दिन जब रामकृष्ण परमहंस गांव लौट कर आए।
उन्होंने देखा बच्चे पीपल के पेड़ के नीचे खेल रहे हैं। वह विषधर को परेशान कर रहे थे। विषधर कुछ नहीं कर रहा है।
ऐसा करता देख उन्होंने बच्चों को डांट कर भगाया , और विषधर को अपने साथ ले गए।
मोरल – संत की संगति में दुर्जन भी सज्जन बन जाते हैं।
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