Breaking News

मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हु


मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हु
शिगिद पार की नील झंकार बन कर
मैं सतरंग सरगम लिए आ रही हु
मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हु

सुनो मीत मेरे के मैं गीत गाला
तुम्हारे लिए हु मैं स्वर का उजाला
मैं लोह बन के जल जल जिए जा रही हु
मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हु

मैं उषा के मन की मधुर साध पहली
मैं संदेया के नैनो में सुधि हो सुनहली
सुगम कर अगम को मैं दोहरा रही हु
मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हु

मैं स्वरताल लेह हु लवलीन सरिता,
मयांचीन अनजाने कवी की हु कविता
जो तूम हो वो मैं हु ये बतला रही हु,
मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हु…………

Check Also

कैलाश पर्वत

कैलाश पर्वत के रहस्य

कैलाश पर्वत के रहस्यों ने वैज्ञानिकों को भी चकित कर दिया है। नासा और रूसी वैज्ञानिकों के अनुसार, कैलाश पर्वत विशेष शक्तियों का केंद्र है।...