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मेरे राम गरीब निवाज़

अब तुम बिन को मोरि राखे लाज,
मेरे राम गरीब निवाज़ ॥

मैं असहाय अधम अग्यानी, पतितन को सिरताज,
पतित उधारन विरदु आपनो, सिद्ध करो महाराज ॥
अब तुम बिन . . .

जिन जिन ध्याये तिन तिन पाये, अजामील गज व्याध,
हमरी बारी जाय छिपे तुम, किन कुंजन में आज ॥
अब तुम बिन . . .

धीरज दया क्षमा शुचिता दम संयम सच को ज्ञान,
दो हमको ये सद् गुन सारे, कृपा करो महाराज ॥
अब तुम बिन . . .

मैं अपराधी हूँ बड़ाऽऽऽ, (मुझ में) अवगुन भरा विकार,
क्षमा करो अपराध सब, अपना विरद विचार ॥
अब तुम बिन . . .

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