मेरी उम्मीद का दीपक कभी बुजने नही देना
श्याम जो तुम से पाया है कभी लुटने नही देना
मैं सच की राह पर चल कर जाऊ गी अपनी मंजिल पर,
दया क्या ये कम है ओ घनश्याम प्यारे
जो चरणों में तेरे ठिकाना मिला है
बड़े भाग्यशाली है वो तेरे बंदे जिहने आप से दिल लगाना मिला है
मुरारी मैं रेहमत के सदके तुम्हारी जो चरणों में ये सिर झुकाना मिला है
वो क्या भागे जन्नत की परवाह करेगे जिहने आप का आशियाना मिला है
मैं सच की राह पर चल कर जाऊ गी अपनी मंजिल पर,
झूठ के आगे मेरा सिर कभी झुकने नही देना
मैं जब भी ठोकरे खाऊ सहारा आप का पाऊ,
आसारा इस जहां का मिले न मिले
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए
चाँद तारे फलक पर दिखे न दिखे मुझको तेरा नजारा सदा चाहिए
मेरी धीमी है चाल और पथ है विशाल हर कदम पर मुसीबत है अब तू स्म्बाल
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