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मने क्या पूछे बाबा तने सब बाता का घेरा से


क्यों छोड़ दिया खाटू आना
भाई कौन सा मतबल तेरा से
मने क्या पूछे बाबा तने सब बाता का घेरा से

मैं करू नोकरी कची मेरे सिर पे भोज धना बाबा
ईट मुस्किल ही आऊ गा मने जाना पड़े रोज बाबा
मेरी सरकारी लगवादे ने चुटकी का काम यो तेरा से
मने क्या पूछे बाबा तने सब बाता का घेरा से

मने बस में दच्की लागे तेरी रेल में भीड़ घनी बाबा
रिंग्स से पैदल जाना अब इतना जोर नही बाबा
इक नई कार दिल वा दे ने बस इतना काम तेरा से
मने क्या पूछे बाबा तने सब बाता का घेरा से

जब आँख खुली मेरी भाइयो मैं ख़ुशी के मारे झूम उठा
मैंने पकड़ी पेहली गाडी और खाटू नगरी दोड पड़ा,
मने देख के मुसकावे बाबा और पूछे हाल के तेरा से
मने क्या पूछे बाबा तने सब बाता का घेरा से

घर आया जब मैं वापिस मेरे घर में थी खुशियाँ छाई,
जो माँगा था बाबा से मेरी सरकारी चिठ्ठी आई
ललित कहे मैं जान गया यो सारा जादू तेरा से
मने क्या पूछे बाबा तने सब बाता का घेरा से………….

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